भारत में डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार, जानिए इसके पीछे की पूरी तैयारी

भारत में डिजिटल इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही डेटा सेंटर्स का नेटवर्क भी तेजी से फैल रहा है। आइए जानते हैं कि एक क्लिक के पीछे काम करने वाले इन डेटा सेंटर्स का तंत्र कितना बड़ा है और देश की तैयारी क्या है।

डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारत में डेटा सेंटर का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ई-गवर्नेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी सेवाओं के पीछे डेटा सेंटर एक अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार भी इस क्षेत्र के विस्तार के लिए नीतिगत और आर्थिक स्तर पर कई कदम उठा रही है।

भारत में डेटा सेंटर की स्थापित विद्युत क्षमता वर्ष 2020 में करीब 375 मेगावाट थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 1.57 गीगावाट हो गई है। 2030 तक इसके करीब 8 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

आखिर क्या होता है Data Centre?

डेटा सेंटर एक ऐसी सुरक्षित जगह होती है, जहां बड़ी संख्या में कंप्यूटर सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग उपकरण लगाए जाते हैं। यहां डिजिटल जानकारी को स्टोर करने के साथ-साथ उसे प्रोसेस और मैनेज किया जाता है। जब कोई व्यक्ति मोबाइल पर बैंक बैलेंस चेक करता है, ऑनलाइन पेमेंट करता है, कोई ऐप इस्तेमाल करता है या क्लाउड पर फाइल खोलता है, तो उसके पीछे डेटा सेंटर की तकनीक काम कर रही होती है। इन सेंटरों में सर्वर, स्टोरेज सिस्टम, राउटर, हाई-स्पीड स्विच, साइबर सिक्योरिटी सिस्टम और मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर जैसी कई तकनीकें एक साथ काम करती हैं।

एक क्लिक के पीछे कैसे काम करता है Data Centre?

जब कोई यूजर किसी ऐप या वेबसाइट पर रिक्वेस्ट भेजता है, तो वह नेटवर्क के जरिए डेटा सेंटर तक पहुंचती है। सबसे पहले सिक्योरिटी सिस्टम रिक्वेस्ट की जांच करता है। इसके बाद लोड बैलेंसर उस रिक्वेस्ट को उपलब्ध सर्वर तक पहुंचाता है। एप्लिकेशन सर्वर रिक्वेस्ट को प्रोसेस करता है और जरूरत पड़ने पर डेटाबेस से जानकारी लेता है। इसके बाद जवाब नेटवर्क के जरिए वापस यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर तक पहुंच जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में कई मामलों में केवल 1 से 2 सेकंड लग सकते हैं। यही सिस्टम क्लाउड सेवाओं, ई-गवर्नेंस और AI एप्लिकेशन को बड़े स्तर पर चलाने में मदद करता है।

भारत में कितने बड़े स्तर पर बढ़ रहा है Data Centre सेक्टर?

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की मांग भी बढ़ रही है। PIB के अनुसार, देश के डेटा सेंटर क्षेत्र में करीब 70 अरब डॉलर का निवेश पहले से हो रहा है। इसके अलावा लगभग 90 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट्स की घोषणा की जा चुकी है।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में राष्ट्रीय डेटा सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों की राजधानियों में 37 छोटे डेटा सेंटर भी स्थापित किए गए हैं। ये सरकारी संस्थानों को डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।

सरकार की नीतियों से मिल रहा बढ़ावा

भारत सरकार ने डेटा सेंटर को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दर्जा दिया है। केंद्रीय बजट 2022-23 में डेटा सेंटरों को इंफ्रास्ट्रक्चर की हार्मोनाइज्ड लिस्ट में शामिल किया गया था। इससे इस क्षेत्र के लिए लंबी अवधि का वित्त जुटाना आसान हुआ।

इसके अलावा केंद्रीय बजट 2026-27 में पात्र विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का प्रावधान किया गया है। यह सुविधा भारत स्थित डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने वाले पात्र वैश्विक परिचालनों पर लागू होती है।

AI और सेमीकंडक्टर से भी बढ़ेगी मांग

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की जरूरत और बढ़ने की संभावना है। सरकार ने इंडियाAI मिशन के लिए 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय को मंजूरी दी है। इसके अलावा सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के दूसरे चरण यानी Semicon 2.0 को 15 जुलाई 2026 को 1,27,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई। सरकार का लक्ष्य देश में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है। आईटी हार्डवेयर के लिए PLI स्कीम 2.0 के जरिए सर्वर जैसे उपकरणों के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

Data Centre के लिए बिजली सबसे बड़ी जरूरत

डेटा सेंटर 24 घंटे चलते हैं और इनके सर्वर लगातार बिजली की खपत करते हैं। बिजली की आपूर्ति बाधित होने पर UPS, बैकअप जनरेटर और अन्य सिस्टम काम संभालते हैं। डेटा सेंटर की बढ़ती क्षमता के साथ बिजली की मांग भी बढ़ेगी। PIB ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के हवाले से बताया है कि डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली मांग 2031-32 तक 17 GW तक पहुंच सकती है। इसी वजह से सरकार डेटा सेंटरों के लिए नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है।

Cooling के लिए पानी और नई तकनीक

डेटा सेंटर में हजारों सर्वर लगातार काम करते हैं, जिससे काफी गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है।

अब लिक्विड कूलिंग, डायरेक्ट-टू-चिप कूलिंग, इमर्शन कूलिंग और क्लोज्ड-लूप कूलिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनका उद्देश्य कम संसाधनों में बेहतर कूलिंग उपलब्ध कराना है।

Data Centre क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?

भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सुरक्षित और भरोसेमंद डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर केवल ऑनलाइन सेवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता, AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भारत में डेटा सेंटर क्षमता का 375 मेगावाट से बढ़कर 1.57 GW होना इस क्षेत्र के तेजी से विस्तार को दिखाता है। आने वाले वर्षों में AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और बढ़ने की उम्मीद है।

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