नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे सवालों के बीच विपक्षी दल अब ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में नया महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से संपर्क किया है और दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी की जा रही है।
दोनों सदनों में दिया जाएगा नोटिस
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष की ओर से लोकसभा और राज्यसभा दोनों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाने की तैयारी है। प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और कानूनी विशेषज्ञों से इसकी समीक्षा कराई जा रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, नोटिस अगले सप्ताह या अधिकतम अगले दो सप्ताह के भीतर पेश किया जा सकता है। INDIA ब्लॉक के कई दल इस पहल पर साथ आने की तैयारी में हैं। नए प्रस्ताव में हालिया घटनाक्रम और चुनाव आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों को भी आधार बनाया जा सकता है।
पहले भी दिया जा चुका है नोटिस
ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से इससे पहले भी संसद में प्रयास किया जा चुका है। 24 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिया था, जो अभी लंबित बताया जा रहा है।
इससे पहले मार्च में भी दोनों सदनों में नोटिस दिए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, पहला प्रयास आगे नहीं बढ़ सका था। अब विपक्ष नए सिरे से समर्थन जुटाकर संशोधित नोटिस लाने की तैयारी कर रहा है।
क्यों बढ़ा विवाद?
यह पूरा मामला चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। इन मुद्दों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े विषय शामिल थे।
विपक्ष इन रिपोर्टों को CEC के खिलाफ अपनी कार्रवाई के आधार के तौर पर देख रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने अलग राय या टिप्पणियों को संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने सामने आई रिपोर्टों पर कहा है कि किसी संस्थान में फैसले लेने के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य बात है। आयोग के मुताबिक, लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-परख निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
EC ने यह भी कहा है कि उसके आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। आयोग ने उन रिपोर्टों की उस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया है कि इन आपत्तियों से आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया में किसी तरह का विभाजन साबित होता है।
25 सितंबर को प्रदर्शन की तैयारी
महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी के अलावा कांग्रेस ने अपनी राज्य इकाइयों से 25 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने को कहा है। पार्टी की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग भी उठाई जा रही है।
यह विरोध SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की व्यापक राजनीतिक मुहिम का हिस्सा है। अलग-अलग विपक्षी नेता इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।
CEC को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी नियुक्तियों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके लिए संसद में प्रस्ताव और निर्धारित जांच प्रक्रिया से गुजरना होता है।
नोटिस को आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसद या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आरोपों की जांच होती है और संसद में प्रस्ताव पर मतदान किया जाता है।
इसलिए महाभियोग का नोटिस दिया जाना अपने आप में CEC को पद से हटाए जाने का फैसला नहीं है। आगे की कार्रवाई संसद में प्रस्ताव के स्वीकार होने, जांच और मतदान जैसी संवैधानिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है।
SIR बना विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बड़ा मुद्दा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष लंबे समय से चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता जरूरी है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित की जा रही है। ऐसे में अब नए महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी के बीच SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस संसद में भी पहुंचने की संभावना है।