नागोया: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान सुजीत कलकल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीत लिया है। शुक्रवार को खेले गए फाइनल में सुजीत ने ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव को 10-9 से हराया। मुकाबले के दौरान एक समय भारतीय पहलवान 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी दौर में लगातार अंक जुटाकर उन्होंने मुकाबले का रुख पलट दिया। यह एशियन गेम्स 2026 में कुश्ती में भारत का पहला गोल्ड मेडल है। सुजीत की इस जीत के साथ 65 किग्रा वर्ग में भारत को एक बार फिर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक मिला है। इससे पहले इसी वर्ग में योगेश्वर दत्त ने 2014 और बजरंग पूनिया ने 2018 में गोल्ड जीता था।
2-9 से पिछड़ने के बाद ऐसे पलटा मुकाबला
फाइनल में ताजिकिस्तान के कुडिएव ने शुरुआत से ही सुजीत पर दबाव बनाए रखा। मुकाबले के दौरान भारतीय पहलवान 2-9 से पीछे हो गए थे। उस समय ऐसा लग रहा था कि गोल्ड मेडल उनके हाथ से निकल सकता है। लेकिन सुजीत ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार टेकडाउन के जरिए अंक जुटाने शुरू किए और अंतर को कम किया। अंतिम मिनटों में उनके लगातार हमलों ने कुडिएव को दबाव में ला दिया। सुजीत ने आठ अंक लगातार हासिल करते हुए स्कोर 10-9 कर दिया और अंततः मुकाबला अपने नाम कर लिया।
फाइनल से पहले ओलंपिक चैंपियन को दी थी मात
गोल्ड मेडल तक पहुंचने के रास्ते में सुजीत ने जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियूका को भी हराया। सेमीफाइनल मुकाबला 3-3 से बराबर रहा, लेकिन आखिरी स्कोरिंग मूव के आधार पर सुजीत को विजेता घोषित किया गया। इस जीत के साथ सुजीत ने फाइनल में जगह बनाई और फिर कुडिएव के खिलाफ भी मुश्किल परिस्थिति से वापसी करते हुए गोल्ड अपने नाम किया।
ईरान और अफगानिस्तान के पहलवानों को भी हराया
सुजीत का सफर फाइनल तक आसान नहीं रहा। उन्होंने शुरुआती मुकाबले में अफगानिस्तान के सैयद उमर जजई को 13-3 से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेहसवादकौही को भी बिना कोई अंक गंवाए तकनीकी श्रेष्ठता से मात दी। इसके बाद सेमीफाइनल में जापान के ओलंपिक चैंपियन कियूका को हराकर उन्होंने फाइनल का टिकट हासिल किया।
कौन हैं सुजीत कलकल?
सुजीत कलकल का जन्म 5 नवंबर 2002 को हरियाणा के भिवानी जिले के इमलोटा गांव में हुआ। उनके पिता दयानंद कलकल खुद राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे हैं और सुजीत ने गांव के अखाड़े से कुश्ती की शुरुआत की। बाद में उन्होंने सोनीपत में ट्रेनिंग की, जहां उन्हें उच्च स्तर के पहलवानों के साथ अभ्यास का मौका मिला। सुजीत ने जूनियर स्तर पर भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। 2026 में उन्होंने सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 65 किग्रा वर्ग का गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद वह इस वर्ग में UWW रैंकिंग में नंबर-1 तक पहुंचे।
2026 में लगातार शानदार प्रदर्शन
सुजीत के लिए 2026 का साल खास रहा है। एशियन गेम्स से पहले एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की। अब एशियन गेम्स में भी गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने प्रदर्शन को एक और बड़ी उपलब्धि में बदल दिया है।
65 किग्रा में भारत की गोल्ड परंपरा कायम
सुजीत का गोल्ड इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने उसी 65 किग्रा वर्ग में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता है, जिसमें योगेश्वर दत्त ने 2014 और बजरंग पूनिया ने 2018 में गोल्ड हासिल किया था। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारतीय पहलवान कोई गोल्ड नहीं जीत सके थे, ऐसे में सुजीत की जीत भारत की कुश्ती टीम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।