GST व्यवस्था में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली GST Council की बैठक में टैक्स अनुपालन से जुड़े कई नियमों को आसान बनाने पर चर्चा होनी है. इनमें पेनल्टी कम करने, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सरल करने और रिफंड से जुड़े मामलों को आसान बनाने के साथ-साथ GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों में बदलाव का प्रस्ताव भी चर्चा में है. हालांकि, गिरफ्तारी की शक्ति को पूरी तरह खत्म करने का फैसला अभी नहीं हुआ है. मौजूदा CGST कानून की धारा 69 कुछ गंभीर GST अपराधों के मामलों में आयुक्त को गिरफ्तारी की अनुमति देने का अधिकार देती है.
GST में गिरफ्तारी के नियमों में क्या बदलाव संभव?
रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार GST से जुड़े ऐसे मामलों में गिरफ्तारी की शक्तियों को सीमित करने पर विचार कर रही है, जहां स्पष्ट राजस्व नुकसान या धोखाधड़ी का मामला सामने नहीं आता. इसका उद्देश्य ईमानदार कारोबारियों को अनावश्यक कार्रवाई से बचाना और टैक्स अधिकारियों की शक्तियों के इस्तेमाल में ज्यादा स्पष्टता लाना है. हालांकि गंभीर टैक्स चोरी और वास्तविक धोखाधड़ी के मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई जारी रखने की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर है.
7 अक्टूबर की बैठक में कई बड़े प्रस्ताव
GST Council की बैठक में सिर्फ गिरफ्तारी से जुड़े नियम ही नहीं, बल्कि GST अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने वाले कई प्रस्तावों पर विचार किया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें—
- सामान्य पेनल्टी को 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव
- गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में पेनल्टी को टैक्स राशि के 10 फीसदी तक सीमित करने का प्रस्ताव
- शो-कॉज नोटिस जारी करने के लिए 5 हजार रुपये की न्यूनतम सीमा
- छोटे कारोबारियों के लिए लेट फीस में राहत
- GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना
- रिफंड प्रक्रिया में सुधार
- इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े विवाद कम करने के उपाय शामिल हैं।
छोटे कारोबारियों को भी मिल सकती है राहत
प्रस्तावित बदलावों में छोटे टैक्सपेयर्स के लिए लेट फीस से जुड़ी राहत भी शामिल है. रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में 5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले कुछ टैक्सपेयर्स को तय शर्तों के तहत देरी से रिटर्न दाखिल करने पर लेट फीस में छूट मिल सकती है. इसके अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए GST रजिस्ट्रेशन को भी सरल बनाने पर विचार किया जा रहा है.
ITC विवाद कम करने की कोशिश
GST Council की बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हो सकती है. कई बार सप्लायर की ओर से इनवॉइस संबंधी जानकारी समय पर अपडेट नहीं होने के कारण खरीदार का ITC प्रभावित होता है. ऐसे मामलों में टैक्स देनदारी और ITC को रिटर्न में एडजस्ट करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है. GSTR-3B में जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया और इंटरफेस में भी सुधार की संभावना है.
GST रजिस्ट्रेशन और कैंसिलेशन होगा आसान?
Law Committee की सिफारिशों के आधार पर GST रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट और एकरूप बनाने की तैयारी है. इसके तहत आवेदन में मांगी जाने वाली जानकारी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं. कुछ परिस्थितियों में रजिस्ट्रेशन डिटेल में बदलाव को GST पोर्टल के जरिए ऑटोमैटिक अप्रूवल देने और GST रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव भी है.
IPR और Metro Rail को लेकर भी प्रस्ताव
GST Council की बैठक के एजेंडे में कुछ अन्य तकनीकी बदलाव भी शामिल हो सकते हैं. स्थायी रूप से Intellectual Property Rights यानी IPR ट्रांसफर को GST के तहत सेवा की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव चर्चा में आ सकता है. इसके अलावा Metro Rail systems को e-way bill व्यवस्था के दायरे में लाने पर भी विचार किए जाने की रिपोर्ट है.
अभी अंतिम फैसला नहीं
गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी प्रस्ताव अभी विचार और सिफारिश के स्तर पर हैं. 7 अक्टूबर को GST Council की बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और किन बदलावों के लिए कानून में संशोधन की जरूरत होगी. GST Council की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब सरकार का फोकस टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने, अनुपालन का बोझ घटाने और कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर है.