उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेताओं के बीच हुए विवाद के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. इसके साथ ही संबंधित फ्रंटल संगठनों की इकाइयों और गोरखपुर से जुड़े प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों को भी पदमुक्त कर दिया गया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद
शनिवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में समाजवादी पार्टी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. यह कार्यक्रम पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ अभियान के तहत आयोजित किया गया था, जो 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान बैठने की जगह को लेकर विवाद शुरू हुआ. गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से 2027 विधानसभा चुनाव में सपा टिकट के दावेदार अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे. इसी दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ उनकी कहासुनी हो गई और विवाद बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया.
पूर्व जिलाध्यक्ष को थप्पड़ मारने का आरोप
विवाद के दौरान पूर्व सपा जिलाध्यक्ष नगीना साहनी और अंशुमान सिंह के बीच धका मुक्की हो गयी. जिसका आरोप अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह पर लगाया गया है. घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया. हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं. नगीना साहनी की ओर से मारपीट और धमकी के आरोप लगाए गए हैं, जबकि अंशुमान सिंह ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताते हुए बदनाम करने का आरोप लगाया है.
अंशुमान सिंह को पार्टी से किया गया निष्कासित
विवाद के बाद समाजवादी पार्टी ने अंशुमान सिंह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद रविवार को पार्टी नेतृत्व ने गोरखपुर संगठन के स्तर पर व्यापक कार्रवाई करते हुए जिला और महानगर इकाई को भंग करने का फैसला लिया.
जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष भी पदमुक्त
अखिलेश यादव के फैसले के तहत गोरखपुर के जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष समेत जिला और महानगर कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी पदमुक्त कर दिए गए हैं. इसके अलावा पार्टी के संबंधित फ्रंटल संगठनों के अध्यक्ष, पदाधिकारी और सदस्य भी तत्काल प्रभाव से अपने पदों से हटा दिए गए हैं. कार्रवाई का दायरा गोरखपुर से जुड़े प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों तक भी बताया गया है. यानी पार्टी का फैसला केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे स्थानीय संगठन में बदलाव का रास्ता खुल गया है.
2027 चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव
अखिलेश यादव का यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं. गोरखपुर पूर्वांचल की राजनीति में महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है. ऐसे में जिला और महानगर संगठन को एक साथ भंग किए जाने को पार्टी के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है. फिलहाल नई जिला और महानगर कार्यकारिणी के गठन को लेकर पार्टी की ओर से कोई जानकारी सामने नहीं आई है. अब नजर इस बात पर होगी कि पार्टी गोरखपुर में नए संगठन की जिम्मेदारी किन नेताओं को सौंपती है.