दीपके हिरासत में, फिर भी तिरंगा मार्च पर CJP का क्या है रुख?

दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया।
दीपके हिरासत में, फिर भी तिरंगा मार्च पर CJP का क्या है रुख?

नई दिल्ली। दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया. इस कार्रवाई के बाद CJP ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस और सरकार पर निशाना साधा. पार्टी ने कहा, “तिरंगा तो लहराकर रहेगा, रोक सको तो रोक लो.” दीपके ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में मार्च का आह्वान किया था. हालांकि, पुलिस ने उन्हें पहले ही नोटिस देकर कार्यक्रम आयोजित नहीं करने को कहा था.

‘तिरंगा फहराना है, तो कहीं और जगह बता दीजिए’

CJP की ओर से जारी वीडियो में पुलिस अधिकारी दीपके को बताते दिखाई देते हैं कि इलाके में BNSS की धारा 163 लागू है और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है. इस पर दीपके कहते हैं कि वह केवल तिरंगा फहराना चाहते हैं. अगर सेंट्रल पार्क में इसकी अनुमति नहीं है, तो पुलिस उन्हें कोई दूसरी जगह बता दे.

वीडियो में दीपके पुलिस से यह भी पूछते हैं कि उन्होंने कौन-सा कानून तोड़ा है. जब अधिकारी उनके पीछे भीड़ होने की बात कहते हैं, तो दीपके जवाब देते हैं कि वह अकेले हैं और उनके पीछे मौजूद लोग मीडिया के सदस्य हैं. इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें अपने साथ ले जाते दिखाई देते हैं.

CJP का आरोप- राष्ट्रीय ध्वज फहराने से डर रही सरकार

दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार युवाओं के राष्ट्रीय ध्वज फहराने से डर रही है. पार्टी ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति और विरोध के अधिकार का उल्लंघन बताया.

CJP ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि जितने अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा, उतने ही अधिक युवा विरोध के लिए आगे आएंगे. संगठन ने तिरंगा मार्च जारी रखने का संकल्प दोहराते हुए कहा, “तिरंगा तो हम लहराकर रहेंगे, रोक सको तो रोक लो.” ये पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप हैं.

आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में था मार्च

CJP ने कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च का ऐलान अपने दो नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी के विरोध में किया था. दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचने और नारेबाजी करने के बाद हिरासत में लिया गया था. अगले दिन उन्हें गिरफ्तार कर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है. संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है.

मंडी हाउस से AISF की नेहा बोरा भी हिरासत में

तिरंगा मार्च को लेकर जारी घटनाक्रम के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की नेहा बोरा को भी दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस से हिरासत में लिया. रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने वीडियो जारी कर समर्थकों से वहां पहुंचने और मार्च में शामिल होने की अपील की थी.

हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने इसे देश को बचाने की लड़ाई बताया. उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें तिहाड़ जेल भेज सकती है.

कनॉट प्लेस में सुरक्षा बढ़ाई गई, सेंट्रल पार्क बंद

प्रस्तावित मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम जनता के लिए बंद रखने की घोषणा की गई थी. पुलिस ने इलाके में लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कहा कि बिना अनुमति भीड़ जुटाने या मार्च निकालने पर कार्रवाई की जा सकती है.

दिल्ली पुलिस ने दीपके को मार्च आयोजित नहीं करने का नोटिस भी दिया था. पुलिस की कार्रवाई का आधार कानून-व्यवस्था और लागू प्रतिबंध बताए गए हैं, जबकि CJP का कहना है कि उसका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय ध्वज फहराना और अपने नेताओं के समर्थन में आवाज उठाना था.

तिरंगा मार्च को लेकर टकराव जारी

अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली में प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर विवाद और बढ़ गया है. CJP इसे अपने विरोध और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार से जोड़ रही है, जबकि पुलिस ने लागू प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था का हवाला दिया है. अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी.

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