नई दिल्ली: भगोड़े अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के आपराधिक संगठन ‘D-कंपनी’ को ‘भारत-आधारित’ बताए जाने पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN)में कड़ी आपत्ति जताई है. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट में किए गए इस उल्लेख पर भारतीय प्रतिनिधि रघु पुरी ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे पूरे मामले की तस्वीर बदल जाती है. भारत ने चेतावनी दी कि इस तरह की गलतियां संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
‘तथ्यात्मक गलतियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए’
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने आतंकवाद से मुकाबले के दौरान मानवाधिकारों की रक्षा से संबंधित विशेष प्रतिवेदक बेन सॉल की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी. पुरी ने कहा कि भारत अन्य मंचों पर भी विशेष प्रतिवेदकों की रिपोर्टों में कथित तथ्यात्मक गलतियों और जवाबदेही की कमी को लेकर चिंता जताता रहा है.
रघु पुरी ने कहा, रिपोर्टों में तथ्यात्मक गलतियां होने और उनके लिए जवाबदेही तय नहीं होने से सदस्य देशों के सामने ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है, जिसे बाद में बदलना मुश्किल होता है. उन्होंने इसे संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता के लिए चिंता का विषय बताया.
‘D-कंपनी को भारत-आधारित बताना वास्तविकता से अलग तस्वीर पेश करता है’
रिपोर्ट में 2003 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से अल-कायदा से संबंधों के कारण D-कंपनी के सरगना को प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने का उल्लेख किया गया है. इसी संदर्भ में संगठन को ‘भारत-आधारित’ बताया गया. रघु पुरी ने इस विवरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रिपोर्ट की इस पंक्ति को अलग से पढ़ने पर वास्तविक स्थिति की गलत तस्वीर सामने आती है. उनके मुताबिक, दाऊद इब्राहिम और उसका संगठन 1993 के आतंकवादी हमलों के मामलों में भारत में वांछित रहे हैं.
पुरी ने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध करने के कारणों के विवरण में संबंधित तथ्यों का उल्लेख मौजूद है, उन्होंने कहा कि इन तथ्यों को रिपोर्ट में शामिल नहीं करना अफसोसजनक है.
‘दाऊद 2003 की सूची में शामिल होने से पहले ही भारत छोड़ चुका था’
भारतीय प्रतिनिधि ने दाऊद इब्राहिम के भारत से बाहर जाने और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल किए जाने के समय का भी जिक्र किया, पुरी के कहा- “दाऊद 2003 में सूचीबद्ध किए जाने से काफी पहले भारत छोड़ चुका था, उन्होंने कहा कि देश से बाहर रहने के दौरान उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण सूची में शामिल किया गया था.”
पुरी ने जोर देकर कहा कि दाऊद इब्राहिम आज भी भारत में वांछित अपराधी है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सूची में दर्ज जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि दाऊद उसी देश में रहता है, जहां अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन का पता चला था और 2011 में अमेरिकी अभियान में उसे मार गिराया गया था. यह पाकिस्तान की ओर स्पष्ट संकेत था.
संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
रघु पुरी ने कहा कि- “विशेष जनादेश धारकों की रिपोर्टों में तथ्यात्मक गलतियों को नजरअंदाज करना संयुक्त राष्ट्र को नुकसान पहुंचा सकता है.” उनके मुताबिक, ऐसी रिपोर्टों में निष्पक्षता और जवाबदेही के उच्च मानकों का पालन होना चाहिए. भारत की आपत्ति का मुख्य आधार यह है कि D-कंपनी को ‘भारत-आधारित’ बताने से दाऊद इब्राहिम की मौजूदा स्थिति और उसके खिलाफ भारत में दर्ज मामलों का पूरा संदर्भ सामने नहीं आता.
पाकिस्तान के बयान पर भी भारत ने दिया जवाब
इसी बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की ओर से भारत, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी. पुरी ने इन टिप्पणियों को राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बताते हुए खारिज किया और दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं.
इस तरह संयुक्त राष्ट्र में भारत की आपत्ति केवल D-कंपनी के वर्णन तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत ने रिपोर्टों में तथ्यात्मक सटीकता, निष्पक्षता और जवाबदेही के मानकों पर भी जोर दिया.