दिल्ली में पुलिस का अनोखा विरोध! अपने ही विभाग के खिलाफ सड़क पर उतरे जवान, पुलिस ने ही रोका प्रदर्शन

राजधानी दिल्ली में सोमवार को एक ऐसा अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने पुलिस विभाग के भीतर चल रहे असंतोष को सामने ला दिया.
दिल्ली
दिल्ली में पुलिस का अनोखा विरोध!

राजधानी दिल्ली में सोमवार को एक ऐसा अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने पुलिस विभाग के भीतर चल रहे असंतोष को सामने ला दिया. दिल्ली पुलिस के जवान अपने ही विभाग के दो अधिकारियों के तबादले के विरोध में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे. खास बात यह रही कि प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को रोकने के लिए भी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ही मौके पर मौजूद थे. यानी वर्दी पहने जवान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और उन्हें रोकने की जिम्मेदारी भी उसी विभाग के अधिकारियों के पास थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर करीब 80 पुलिसकर्मी इकट्ठा हुए. वे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले का विरोध कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों की पुरानी पोस्टिंग बहाल की जाए और पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के साथ खुली बातचीत के लिए संपर्क सभा आयोजित की जाए.

आखिर क्यों नाराज हैं दिल्ली पुलिस के जवान?

इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई एक घटना से हुई थी. यहां एक झड़प के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने का आरोप सामने आया था. इसके बाद वकीलों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दिल्ली की जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी. वकीलों के दबाव और कार्रवाई की मांग के बीच गांधी नगर सब-डिवीजन के तत्कालीन एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया. 28 अक्टूबर को तबादले के आदेश जारी होने के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी. लेकिन उनके तबादलों से दिल्ली पुलिस के एक वर्ग में नाराजगी फैल गई. पुलिसकर्मियों का मानना है कि अधिकारियों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई हुई है और इससे पुलिस बल का मनोबल प्रभावित हो सकता है.

प्रदर्शन रोकने पहुंचे DCP

पुलिस मुख्यालय के बाहर जवानों के इकट्ठा होने की सूचना मिलते ही नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे. उन्होंने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिसकर्मियों से बातचीत की और उन्हें प्रदर्शन समाप्त करने के लिए समझाने की कोशिश की. DCP ने पुलिसकर्मियों को अनुशासित बल का सदस्य होने की याद दिलाते हुए प्रदर्शनकारियों की तरह व्यवहार नहीं करने की सलाह दी. उन्होंने कुछ जवानों को अपने साथ पुलिस मुख्यालय के अंदर चलने के लिए भी कहा, लेकिन प्रदर्शनकारी इसके लिए तैयार नहीं हुए. प्रदर्शन कर रहे जवानों ने पुलिस कमिश्नर के साथ संपर्क सभा आयोजित करने की मांग दोहराई. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान पुलिस मुख्यालय का कोई वरिष्ठ अधिकारी बाहर आकर प्रदर्शनकारियों की शिकायतें सुनने नहीं पहुंचा.

ACP के वीडियो के बाद WhatsApp ग्रुप में जुटने की अपील

इस प्रदर्शन की तैयारी पहले से चल रही थी. एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने शनिवार को एक वीडियो जारी कर पुलिसकर्मियों से 2 नवंबर को सुबह 8 बजे पुलिस मुख्यालय पहुंचकर अपनी बात रखने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि जो जवान ड्यूटी या दूसरी वजहों से मौके पर नहीं पहुंच सकते, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी जुड़ सकते हैं. वहीं, दिल्ली पुलिस के व्हाट्सऐप ग्रुपों में भी पुलिसकर्मियों को मुख्यालय पहुंचने और दोनों अधिकारियों के समर्थन में आवाज उठाने के संदेश साझा किए गए थे. दूसरी तरफ, वरिष्ठ अधिकारियों ने जिला डीसीपी और यूनिट प्रमुखों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को मुख्यालय पहुंचने से रोकने के निर्देश दिए थे.

पुलिस महासंघ ने प्रदर्शन से बनाई दूरी

इस बीच दिल्ली पुलिस महासंघ ने प्रस्तावित प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया. महासंघ की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया कि वह इस तरह के कदम का समर्थन नहीं करता और मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए.

3 नवंबर को पुलिसकर्मियों से मिलेंगे दिल्ली के LG

विवाद के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का पुलिसकर्मियों के साथ संवाद कार्यक्रम भी निर्धारित है. यह कार्यक्रम 3 नवंबर को शाम 4 बजे किंग्सवे कैंप स्थित उत्सव सदन में आयोजित होगा. इसमें कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मी शामिल होंगे. फिलहाल, दिल्ली पुलिस के भीतर यह विवाद केवल दो अधिकारियों के तबादले तक सीमित नहीं रह गया है. एक तरफ वकीलों की शिकायतों के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई है, तो दूसरी तरफ उसी कार्रवाई के खिलाफ पुलिसकर्मियों का विरोध. ऐसे में अब सबकी नजर पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर है.

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