सपा सांसद ने क्यों कहा नंगे पैर जाने की बात? राम मंदिर ध्वजारोहण से पहले सियासी हलचल तेज

Ayodhya Ram Mandir : रामलला की नगरी अयोध्या एक बार फिर जगमगाने के लिए तैयार है। राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण की तैयारियां लगभग पूरी तरह से हो चुकी है। 25 नवंबर को पीएम मोदी द्वारा भगवा ध्वज फहराकर ऐतिहासिक ध्वजारोहण का शुभारंभ किया जाएगा। इस कार्यक्रम को सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक रूप भी मिलेगा क्योंकि यह लंबे समय से प्रतीक्षित राम मंदिर निर्माण की सफलता का प्रतीक है। हालांकि इस कार्यक्रम के बीच सियासी हलचल भी चरम पर है।

सियासत भी तेज दो दिन पहले सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य महाराज ने सपा सांसद अवधेश प्रसाद पर आरोप लगाया कि वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई नहीं दे रहे। इस पर अवधेश प्रसाद ने कहा कि उन्हें अभी तक समारोह का आधिकारिक न्योता नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें न्योता मिला तो वह सारा कामधाम छोड़कर नंगे पैर वहां जाएंगे।

सांसदों के बयान अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि तुलसीदास जी ने लिखा है, “दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने प्रभु श्रीराम के राज की मान्यताओं को बिगाड़ दिया है। वहीं, इटावा से सपा सांसद जितेंद्र दोहरे ने तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर के ध्वजारोहण जैसे धार्मिक कार्यक्रम में पीएम का जाना राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बनाता।

भाजपा प्रवक्ता एसएन सिंह ने कहा कि सपा नेताओं को अयोध्या की भव्यता चुभती है और वे अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।

स्थानीय सांसद की नजर अवधेश प्रसाद ने यह भी कहा कि स्थानीय सांसद होने के नाते वह समारोह की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आगमन के चलते सुरक्षा और अन्य तैयारियां सरकारी अधिकारियों के ऊपर हैं। उन्होंने कहा, “अयोध्या में पैदा होने और सांसद होने के नाते मेरी भी नैतिक जिम्मेदारी है। इसीलिए मैं तैयारियों का अवलोकन करने गया था।”

धार्मिक आस्था और खुशी अवधेश प्रसाद ने समारोह में भाग लेने की अपनी खुशी भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रभु श्रीराम, हनुमान जी, मां सीता और सरयू माई की कृपा प्राप्त है और इस पवित्र अवसर का हिस्सा बनकर वह गर्व महसूस कर रहे हैं।

राम मंदिर का यह ध्वजारोहण समारोह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि अयोध्या के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव का भी प्रतीक माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम देशभर में उत्साह और श्रद्धा का संचार करेगा।

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