हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) अब शिक्षा के केंद्र के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय जांच का बड़ा विषय बन गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यूनिवर्सिटी और उसके ट्रस्ट के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) की गंभीर जांच शुरू की है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय द्वारा कथित तौर पर 415 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी दावों और धोखाधड़ी से अर्जित धन के इस्तेमाल से जुड़ी है।
यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जव्वाद अहमद सिद्दीकी को पहले ही मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी की जांच मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और विस्तार में उपयोग किया गया धन क्या अपराध से अर्जित आय (proceeds of crime) थी।
एजेंसी का मानना है कि यूनिवर्सिटी ने 415 करोड़ रुपये से अधिक की राशि धोखाधड़ी और फर्जी दावों के माध्यम से जुटाई। सूत्रों के अनुसार, इस वित्तीय अनियमितता के तार कथित तौर पर रेड फोर्ट धमाके की जांच से जुड़े कुछ संदिग्ध लेनदेन से भी जुड़े हो सकते हैं, जिससे यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो गया है।
ईडी अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी की चल और अचल संपत्तियों की पहचान कर रही है। धौज इलाके में बनी इमारतों और कैंपस पर खर्च किए गए धन के वास्तविक स्रोत का पता लगाने के बाद इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (Attach) किया जा सकता है।
वित्तीय गड़बड़ियों के साथ ही, यूनिवर्सिटी पर यूजीसी (UGC) और नैक (NAAC) की आधिकारिक मान्यता को लेकर भी गलत प्रचार करने का आरोप है, जिससे विद्यार्थियों को गुमराह किया गया। हालांकि, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच जारी रहने के बावजूद छात्रों की पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था देखी जा रही है, ताकि उनके भविष्य पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े।
यह मामला शिक्षा के क्षेत्र में वित्तीय पारदर्शिता और नियामक मानकों की गंभीरता पर गहरे सवाल उठाता है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े इस विवाद ने देशभर का ध्यान खींचा है, और अब यह देखना बाकी है कि ED की यह कार्रवाई शिक्षा संस्थानों में व्याप्त धोखाधड़ी पर नकेल कसने में कितनी दूर तक जाती है।








