भारतीय सेना राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता की सबसे मजबूत ढाल है। सीमाओं पर दिन-रात तैनात रहकर, हमारे जवान हर परिस्थिति में मातृभूमि की रक्षा करते हैं। हर साल 15 जनवरी का दिन भारतीय सेना दिवस (Army Day) के रूप में मनाया जाता है। यह दिन न केवल सेना के बलिदान और शौर्य को याद करने का अवसर है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक क्षण को भी दर्शाता है जब भारतीय सेना का नेतृत्व पूरी तरह से भारतीय हाथों में आ गया था।
भारतीय सेना का योगदान केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। कठिन मौसम, दुर्गम पहाड़, रेगिस्तान और घने जंगलों में भी उनका साहस, अनुशासन और बलिदान अटूट रहता है। सेना आपदा राहत, शांति स्थापना और मानवीय सहायता में भी अहम भूमिका निभाती है, जो इसे हर देशवासी के लिए गर्व और विश्वास का प्रतीक बनाती है।
सेना दिवस के अवसर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सैन्य तैयारियों पर जोर दिया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “हम अपने दुश्मनों और देशवासियों को सबसे बड़ा संदेश यह देना चाहते हैं कि भारतीय सेना हर तरह के युद्ध और हर प्रकार के हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हम भविष्य के युद्धों के लिए भी तैयार हैं और समय के साथ खुद को लगातार ढालते रहेंगे।”
15 जनवरी को सेना दिवस मनाने का कारण भारतीय सैन्य इतिहास का एक गौरवशाली क्षण है। इसी दिन 15 जनवरी 1949 को, जनरल (बाद में फ़ील्ड मार्शल) के. एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय थल सेना की कमान संभाली थी। यह परिवर्तन भारत की सैन्य शक्ति की आत्मनिर्भरता और स्वतंत्र नेतृत्व की शुरुआत थी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को याद करने के लिए ही हर साल यह दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में विशेष सैन्य परेड, सम्मान समारोह और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें मुख्य कार्यक्रम नई दिल्ली में अमर जवान ज्योति स्थल पर होता है।
भारतीय सेना दिवस हमें उन सभी सैनिकों के बलिदान, वीरता, और अनुशासन को सम्मान देने का अवसर देता है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। यह दिन भारतीय सेना के अडिग साहस और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण के लिए हमेशा कृतज्ञ रहने की प्रेरणा देता है।








