देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और गंभीर खतरा सामने आया है। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) समुद्री मार्ग के जरिए भारत पर बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है। इनपुट के अनुसार, आतंकी संगठन ने इस मंसूबे को अंजाम देने के लिए सैकड़ों स्कूबा डाइवर्स और प्रशिक्षित तैराकों को विशेष ट्रेनिंग दी है, जिसके बाद तटीय क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
यह नई चेतावनी 2008 के मुंबई हमलों की भयावह यादें ताज़ा करती है, जब लश्कर के आतंकवादी समुद्र के रास्ते ही भारत में घुसने में कामयाब रहे थे और उन्होंने भीषण नरसंहार किया था। उस घटना में 160 से अधिक लोग मारे गए थे। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि समुद्र तटों और बंदरगाहों की विशालता और निगरानी में संभावित खामियों के चलते समुद्री मार्ग आतंकवादियों के लिए आज भी एक प्रमुख लक्ष्य बना हुआ है।
इस नए इनपुट के तहत, लश्कर-ए-तैयबा की यह रणनीति, जिसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर्स का इस्तेमाल शामिल है, समुद्री रास्ते से घुसपैठ को अधिक गुप्त और खतरनाक बनाती है। यह स्पष्ट करता है कि आतंकी संगठन लगातार अपनी रणनीति और तकनीकों को बदल रहे हैं ताकि सुरक्षा बलों को चकमा दिया जा सके और बड़े शहरों को निशाना बनाया जा सके।
इस गंभीर खतरे को देखते हुए, भारत की सुरक्षा एजेंसियां और बल पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। भारतीय नौसेना, कोस्ट गार्ड (तटरक्षक बल) और अन्य तटीय सुरक्षा बल समुद्री क्षेत्र में निगरानी को लगातार मजबूत कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, समुद्री आतंकवादी धमकियों से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
तटीय रडार प्रणालियों की क्षमता और कवरेज को बढ़ाया जा रहा है अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। तटों और बंदरगाहों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके और उसे नाकाम किया जा सके।
यह ताजा घटनाक्रम एक बार फिर रेखांकित करता है कि आतंकवाद का खतरा केवल जमीनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री मार्ग से भी बड़ा जोखिम मंडरा रहा है। देश की सुरक्षा एजेंसियां इस चुनौती का सामना करने के लिए कमर कस चुकी हैं और देश की समुद्री सीमाएं अभेद्य बनाने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।









