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कानपुर लैम्बोर्गिनी हादसा: ₹10 करोड़ की कार, तंबाकू किंग का बेटा और ‘ड्राइवर’ वाली कहानी का सच

पुलिस के पुख्ता सबूत बनाम वकील की 'ड्राइवर' वाली कहानी

कानपुर की वीआईपी रोड पर हुए लैम्बोर्गिनी हादसे ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की Lamborghini Revuelto जब बेकाबू हुई, तो उसने सड़क पर छह लोगों को घायल कर दिया। लेकिन यह मामला सिर्फ तेज़ रफ़्तार का नहीं, बल्कि रसूख और कानून की जंग का बन गया है। पुलिस जहाँ साफ कह रही है कि गाड़ी तंबाकू कारोबारी के.के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे, वहीं बचाव पक्ष एक ‘ड्राइवर’ की कहानी पेश कर रहा है, जिससे मामले में बड़ा ट्विस्ट आ गया है।

यह खौफनाक हादसा 8 फरवरी को दोपहर लगभग 3:15 बजे हुआ था, जब दिल्ली रजिस्ट्रेशन वाली लैम्बोर्गिनी रेवुएल्टो ने पहले एक ऑटो-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर विशाल त्रिपाठी की खड़ी मोटरसाइकिल को घसीटा और अंत में पैदल यात्री तौफीक को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में कुल 6 लोग घायल हुए।

पुलिस के दावे और सबूत

कानपुर पुलिस का दावा सीसीटीवी फुटेज पर आधारित है, जिनमें साफ देखा जा सकता है कि गाड़ी की स्टेयरिंग पर 35 वर्षीय शिवम मिश्रा ही बैठे थे, जो बंशीधर टोबैको कंपनी (बंशीधर एक्सपोर्ट्स) के मालिक के.के. मिश्रा (‘मुन्ना मिश्रा’) के बेटे हैं। चश्मदीदों के आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज में भी दिख रहा है कि हादसे के तुरंत बाद बाउंसर कार से बाहर निकले और शिवम मिश्रा को ड्राइवर की सीट से निकालने की कोशिश की।

वकील का बचाव और विवादित कार्रवाई

दूसरी ओर, मिश्रा परिवार के वकील मृत्युंजय कुमार ने दावा किया है कि शिवम मिश्रा गाड़ी नहीं चला रहे थे, बल्कि उनका काम पर रखा गया ड्राइवर ‘मोहन’ उस वक्त कार चला रहा था। इस बीच, पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठे थे। जनता के गुस्से और मीडिया के दबाव के बाद ही, शुरुआत में ‘अज्ञात’ ड्राइवर के खिलाफ दर्ज की गई FIR में शिवम मिश्रा का नाम जोड़ा गया। इस लापरवाही के चलते ग्वालटोली के एसएचओ संतोष गौर का तत्काल तबादला कर दिया गया है।

तंबाकू किंग के.के. मिश्रा का शाही जीवन

इस मामले को हाई-प्रोफाइल बनाने वाले शिवम मिश्रा के पिता, तंबाकू कारोबारी कृष्ण कुमार मिश्रा (के.के. मिश्रा), उत्तर भारत में अपने तंबाकू साम्राज्य और अत्यधिक विलासितापूर्ण जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। उनके पास रोल्स-रॉयस फैंटम समेत 50-100 करोड़ रुपये की लग्जरी कारों का कलेक्शन है, जिनमें से कई गाड़ियों पर ‘4018’ नंबर प्लेट लगी हुई है। मिश्रा पहले भी 2024 के आयकर छापों के दौरान करोड़ों की बेनामी संपत्ति के खुलासे को लेकर विवादों में रहे हैं। इस दुर्घटना ने एक बार फिर रसूखदारों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

कानपुर की यह दुर्घटना अब केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि कानून के तराजू पर रसूख और जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन गई है। यह देखना बाकी है कि सीसीटीवी के मजबूत सबूतों के सामने ‘ड्राइवर’ वाली कहानी टिक पाती है, या पीड़ितों को असली इंसाफ मिल पाता है।