वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने 42.50 लाख रुपये की बड़ी साइबर ठगी को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत पांच शातिर साइबर अपराधियों को झारखंड के धनबाद से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह ट्रोजन और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोगों के बैंक खातों में सेंध लगाता था।
तिवारीपुर (चोलापुर क्षेत्र) निवासी मदन मोहन मिश्रा की शिकायत पर यह कार्रवाई शुरू की गई थी। मदन मोहन मिश्रा ने बताया था कि उनके बैंक खाते से अवैध तरीके से 42 लाख 50 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं।
कैसे काम करता था ‘ट्रोजन’ गैंग?
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देश पर गठित विशेष टीम की जांच में इस गिरोह के ठगी का तरीका सामने आया। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था:
1. रिमोट एक्सेस हासिल करना: आरोपी पहले ‘ट्रोजन’ और ‘SMS फॉरवर्डर’ आधारित APK फाइल व्हाट्सएप या अन्य माध्यमों से पीड़ित को भेजते थे। पीड़ित के इस फाइल को डाउनलोड करते ही, अपराधी उसके मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेते थे।
2. डेटा चोरी: रिमोट एक्सेस मिलने के बाद, वे इंटरनेट बैंकिंग की यूजर आईडी, पासवर्ड और यहां तक कि OTP भी चुरा लेते थे।
3. म्यूल खातों का उपयोग: ठगी गई रकम को सीधे अपने खातों में भेजने के बजाय, वे ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ (किराये के खातों) में ट्रांसफर कर नकद निकाल लेते थे।
फर्जी दस्तावेज से खुलवाते थे खाते
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले खातों को खुलवाने के लिए फर्जीवाड़ा करता था। वे फर्जी ग्राम प्रधान के लेटर पैड, मुहर और ब्लैंक आधार अपडेट फॉर्म का इस्तेमाल कर आम लोगों के आधार कार्ड पर पता बदल देते थे। बदले हुए पते वाले आधार कार्ड के आधार पर ही नए बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिनका उपयोग ठगी के पैसे रखने के लिए किया जाता था।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने इस गिरोह के शमीम अंसारी, फकरूद्दीन उर्फ निरंजन, नसीम अंसारी, शाहबुद्दीन अंसारी और साहब लाल मरांडी को धनबाद (झारखंड) से गिरफ्तार किया है। ये सभी धनबाद के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के निवासी हैं। पुलिस ने इनके पास से 4 एंड्रॉयड मोबाइल, 66,000 रुपये नकद, फर्जी मुखिया की मुहर, ब्लैंक आधार अपडेट फॉर्म और एक बिना नंबर की ब्रेजा कार बरामद की है। कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं।
फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सके। यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है और स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को अज्ञात APK फाइल डाउनलोड करने के खतरों के प्रति सचेत करती है।









