पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गरम हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निकाले गए बागी विधायक हुमायूं कबीर ने अब ममता सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपनी हत्या की साजिश का आरोप लगाते हुए, आगामी 14 फरवरी को ‘एसपी ऑफिस’ (SP Office) के घेराव का बड़ा ऐलान किया है। विवाद की जड़ बाबरी मस्जिद के निर्माण को रोके जाने से लेकर पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों तक पहुंच गई है, जिसने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
मुर्शिदाबाद के भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर, जो कभी टीएमसी का प्रमुख चेहरा थे, आज वही अपनी पूर्व पार्टी और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। विवाद की ताज़ा वजह मुर्शिदाबाद में निर्माणाधीन ‘बाबरी मस्जिद’ है, जिसकी नींव 6 दिसंबर को रखी गई थी। कबीर ने हाल ही में काम शुरू करवाया, लेकिन पुलिस ने नेशनल हाईवे (NH) पर निर्माण सामग्री ले जा रहे ट्रकों को रोक दिया। पुलिस इसे तनाव रोकने का कदम बता रही है, जबकि कबीर इसे अपनी धार्मिक आस्था और अधिकारों पर सीधा हमला मान रहे हैं।
विधायक हुमायूं कबीर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “मैं 14 तारीख को उनका कॉलर पकड़कर जवाब लूंगा… प्रशासन ने ड्रग डीलरों से 20 करोड़ लिए हैं।” कबीर के निशाने पर सिर्फ ममता सरकार ही नहीं, बल्कि लालगोला ओसी (OC) जैसे पुलिस अधिकारी भी हैं, जिन पर उन्होंने 20 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। टीएमसी से निकाले जाने के बाद कबीर अब अपनी नई ‘जनता उन्नयन पार्टी’ के जरिए अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं। अपनी बेटी की बिल्डिंग को फ्रीज किए जाने के मुद्दे को उन्होंने सम्मान की लड़ाई बना लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा, बल्कि सड़कों पर ही फैसला होगा।
कबीर ने ऐलान किया है कि वह आगामी 14 फरवरी को लगभग एक लाख समर्थकों के साथ बेरहामपुर की सड़कों पर उतरेंगे। उनकी जुबान अब ‘सॉकेट्स चार्ज’ करने और ‘गोलियों’ का सामना करने जैसी हिंसक भाषा बोल रही है, जो चुनावी माहौल से पहले बंगाल में बढ़ते तनाव को दर्शाती है। उन्होंने बीजेपी नेता अर्जुन सिंह पर भी आपत्तिजनक वार करते हुए ममता सरकार को सीधी चुनौती दी है।
हुमायूं कबीर के इन तीखे तेवरों ने मुर्शिदाबाद के प्रशासन की नींद उड़ा दी है। एक ओर धार्मिक भावनाओं का दांव खेला जा रहा है, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि आगामी 14 फरवरी को होने वाला यह बड़ा विरोध प्रदर्शन बंगाल की चुनावी राजनीति को किस मोड़ पर ले जाता है।









