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AIMIM पार्षद सहर शेख के ‘हरे रंग’ वाले बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल

AIMIM पार्षद सहर शेख के 'हरे रंग' वाले बयान

महाराष्ट्र की राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है, खासकर निकाय चुनावों में AIMIM की मजबूत उपस्थिति के बाद। ठाणे महानगरपालिका के मुंब्रा इलाके से नवनिर्वाचित AIMIM पार्षद सहर शेख इन दिनों एक विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में सहर शेख ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है और धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोप लगने शुरू हो गए हैं।

निकाय चुनावों में AIMIM ने कुल 126 सीटों पर जीत दर्ज करके अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। इसी जीत के बीच, मुंब्रा से नवनिर्वाचित युवा पार्षद सहर शेख का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थकों से बात करते हुए उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधा और भावुक अंदाज में कहा कि, ‘आपने उनके घमंड की धज्जियां उड़ा दीं। हम सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के मोहताज हैं।’

विवाद की असली वजह बना उनका अगला बयान, जिसमें सहर शेख ने समर्थकों से आह्वान किया कि, “आने वाले चुनावों में पूरे मुंब्रा को हरे रंग में रंग देना।” विपक्ष ने इस बयान को धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई।

हालांकि, बवाल बढ़ता देख सहर शेख ने तत्काल खुद सामने आकर सफाई दी। सहर शेख ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हरा रंग इसलिए कहा, क्योंकि यही उनकी पार्टी AIMIM के झंडे का रंग है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी का झंडा पीला, भगवा या कोई और रंग होता, तो वह उसी रंग का आह्वान करतीं। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि इंद्रधनुष में हर रंग सबका होता है और किसी भी रंग को किसी समुदाय विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

इस जीत के साथ ही मुंब्रा की स्थानीय राजनीति में समीकरण बदल गए हैं। सहर शेख ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें आखिरी दिन तक शरद पवार गुट की पार्टी (NCP) से टिकट मिलने का भरोसा दिया गया था, लेकिन स्थानीय दबाव के चलते उनका टिकट काट दिया गया। इसके बाद उन्होंने AIMIM का दामन थामा और मुंब्रा से भारी मतों से जीत दर्ज की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुंब्रा-कौसा इलाके में उनकी यह जीत सीधे तौर पर NCP नेता जितेंद्र आव्हाड के लिए एक बड़ी सियासी चुनौती के तौर पर देखी जा रही है।

सहर शेख का यह बयान फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा चुका है, और यह तय है कि मुंब्रा में AIMIM की बढ़ती पकड़ आने वाले विधानसभा चुनावों में ठाणे के सियासी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।