अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म का एक अत्यंत शुभ पर्व है, जो इस वर्ष 19 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन सुख, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। जानिए इस दिन की खरीदारी, दान और शुभ कार्यों का महत्व।
अक्षय तृतीया को माँ लक्ष्मी की कृपा का दिन माना जाता है। इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य का लाभ स्थायी माना जाता है। इस वर्ष, सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल की सुबह 5:51 बजे तक का समय विशेष रूप से सोना या चांदी खरीदने के लिए सबसे शुभ बताया गया है।
इस दिन घर में सुख और समृद्धि बढ़ाने के लिए निम्नलिखित वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं: सेंधा नमक – कर्ज मुक्ति के लिए, रुई (कपास) – शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए, मिट्टी के बर्तन – घर में सुख-समृद्धि के लिए, जौ और पीली सरसों – धन और शुभता के संकेत, तुलसी का पौधा – सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए, कौड़ी और बर्तन – धन लाभ के लिए
हालांकि, कुछ चीजें खरीदने से बचना चाहिए क्योंकि ये नकारात्मक प्रभाव ला सकती हैं: लोहे की वस्तुएँ, कांटेदार पौधे, तेज या धारदार सामान, बासी मिठाई, काले रंग की चीजें, टूटी-फूटी या पुरानी वस्तुएँ, एल्युमिनियम और स्टील के बर्तन।
दान करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार निम्नलिखित चीजों का दान कर सकते हैं: खरबूजा, ककड़ी, मिश्री, सत्तू, पंखा, चटाई, जूते-चप्पल, चावल, नमक, घी, बेलपत्र और मौसमी फल, छाता।
अक्षय तृतीया न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह नए आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला दिन भी है। इस अवसर पर सोना, चांदी और शुभ वस्तुएँ खरीदें और दान-पुण्य करके अपने घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाएँ।








