उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को एक बार फिर अदालत से राहत नहीं मिली है। मामले में सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। राज्य सरकार की ओर से की गई प्रभावी पैरवी के चलते आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी। इस मामले में सरकार का कहना है कि पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
घटना के बाद 24 घंटे में हुई गिरफ्तारी
अंकिता भंडारी हत्याकांड सामने आने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच के बाद करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों को शामिल किया गया।
आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई, जिससे मामले में कानूनी शिकंजा और मजबूत हुआ।
पीड़िता के परिवार की मांगों को दी गई प्राथमिकता
सरकार के मुताबिक, पूरे मामले में अंकिता के परिवार की मांगों और भावनाओं को प्राथमिकता दी गई। परिवार की मांग पर अभियोजन पक्ष को मजबूत करने के लिए सरकारी वकीलों में बदलाव किया गया।
सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि परिवार की मांग पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया, ताकि जांच को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।
परिवार को आर्थिक और सरकारी सहायता
अंकिता के परिवार को सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से सहारा देने के लिए अंकिता के भाई और पिता को सरकारी नौकरी से जोड़े जाने का भी उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कही थी सख्त कार्रवाई की बात
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कहते रहे हैं। सरकार का रुख रहा है कि जघन्य अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को कानून के तहत किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद सरकार ने इसे मामले में अभियोजन की मजबूत पैरवी के तौर पर पेश किया है। हालांकि, जमानत का खारिज होना अपने आप में किसी आरोपी के दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। मामले में अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत के फैसले से तय होती है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है और मामले की कानूनी प्रक्रिया पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है।