प्रयागराज के लोकगायक श्रीकांत वैश्य ने ‘झुलनी का रंगा सांचा…’ लोकगीत से रच दी अमर पहचान
प्रयागराज सिर्फ संगम और धार्मिक आस्था के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध लोक-संस्कृति और संगीत परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। इसी परंपरा को अपनी आवाज़ से नई पहचान देने वाले दृष्टिहीन लोकगायक श्रीकांत वैश्य आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखते हैं। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से … Read more