अयोध्या स्थित राम मंदिर और उससे जुड़े परिसरों में कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था अब और सख्त कर दी गई है। कर्मचारियों की उपस्थिति, ड्यूटी के समय और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए फेस रीडिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्यूटी पर पहुंचने और वापस लौटने के समय कर्मचारियों को फेस रीडिंग करानी होगी। इसके साथ ही रजिस्टर में भी आने-जाने का समय दर्ज किया जा रहा है। यह व्यवस्था ऐसे समय में लागू की गई है, जब मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच चल रही है।
कई परिसरों में लगाए गए फेस रीडिंग कैमरे
राम मंदिर परिसर के अलावा रामघाट कार्यशाला, तीर्थ यात्री सेवा केंद्र, तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र और रामनिवास में भी कैमरे लगाए गए हैं। इनके जरिए कर्मचारियों की उपस्थिति और ड्यूटी से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
जो कर्मचारी बिना सूचना के ड्यूटी से गायब रहते हैं या लगातार देर से पहुंचते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाता है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।
फेस रीडिंग और रजिस्टर में दर्ज समय के आधार पर कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे ड्यूटी में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों की पहचान आसानी से की जा सके।
राम मंदिर से जुड़े कामों में करीब 1,000 कर्मचारी तैनात
राम मंदिर और उससे जुड़े अलग-अलग कार्यों में करीब 1,000 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से करीब 300 कर्मचारी तैनात हैं। ये कर्मचारी तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र, तीर्थ क्षेत्र पुरम और यात्री निवास समेत अलग-अलग स्थानों पर जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
वहीं, मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में SIS के 300 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा सेना के 35 से अधिक सेवानिवृत्त जवान भी राम मंदिर में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
चढ़ावा मामले के बीच पूर्व पदाधिकारियों की सक्रियता चर्चा में
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच के बीच ट्रस्ट के कुछ पूर्व पदाधिकारियों की बढ़ी हुई सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी कर रही है।
चढ़ावा मामले में लापरवाही को लेकर सवालों के घेरे में रहे ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय 25 जुलाई से अयोध्या के अलग-अलग मठ-मंदिरों में जाकर साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी लगातार सक्रियता को लेकर अयोध्या में चर्चा बनी हुई है।
वहीं, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी पिछले करीब एक सप्ताह से विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं। बुधवार को उन्होंने रामकोट की परिक्रमा की, जहां लोगों ने उनका स्वागत भी किया।
गोपाल राव की वापसी के बाद भी बढ़ी हलचल
इसी बीच बुधवार को गोपाल राव के दोबारा अयोध्या पहुंचने और रामलला के दर्शन करने के बाद चर्चाएं और तेज हो गईं। दर्शन के बाद उन्होंने चंपत राय से भी मुलाकात की।
चढ़ावा मामला सामने आने के बाद गोपाल राव 15 जुलाई को अयोध्या से बाहर चले गए थे। अब उनकी वापसी और पूर्व पदाधिकारियों से मुलाकात को लेकर भी अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं।
जांच के बीच मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर जोर
फिलहाल चढ़ावा मामले की एसआईटी जांच जारी है। दूसरी ओर, मंदिर परिसर में कर्मचारियों की निगरानी बढ़ाने और फेस रीडिंग सिस्टम लागू करने को प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब कर्मचारियों की उपस्थिति और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी को तकनीकी माध्यम से भी रिकॉर्ड किया जा रहा है।