बांग्लादेश में आम चुनाव से ठीक पहले सरकार ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मॉब लिंचिंग में मारे गए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के परिवार को 50 लाख टका (बांग्लादेशी मुद्रा) की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। मतदान से महज 24 घंटे पहले लिए गए इस फैसले ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है और यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह एक मानवीय मदद है या फिर चुनावी रणनीति?
दीपू चंद्र दास की हत्या पिछले साल दिसंबर में मायमेनसिंह जिले के भालुका इलाके में हुई थी। दीपू पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाकर एक भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था। इस दर्दनाक घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिसके बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। सरकार ने तब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था और इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की पूरी कोशिश कर रही है, और इसी कड़ी में अब आर्थिक सहायता देने का फैसला लिया गया है।
दीपू अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे, इसलिए उनकी मौत के बाद परिवार आर्थिक रूप से टूट गया था। सरकार ने उनकी स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह पैकेज तैयार किया है:
25 लाख टका की लागत से दीपू के परिवार के लिए एक नया पक्का घर बनाया जाएगा। उनके पिता और पत्नी को 10-10 लाख टका की नकद मदद दी जाएगी ताकि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर सकें। उनके बच्चे के नाम पर 5 लाख टका का फिक्स्ड डिपॉजिट कराया जाएगा, जिससे उसकी भविष्य की पढ़ाई और जरूरतों में मदद मिल सके।
मुख्य सलाहकार कार्यालय ने यह स्पष्ट किया है कि यह सहायता किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर सरकारी सहायता योजना के तहत दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवार को सम्मान के साथ जीवन जीने का मौका देना है।
हालांकि, इस घोषणा के समय को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का बड़ा ऐलान करना स्पष्ट रूप से चुनावी रणनीति है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार हिंदू और अल्पसंख्यक समुदाय को यह संदेश देना चाहती है कि वह उनके साथ खड़ी है, जिससे वोटों पर असर पड़ सकता है। वहीं, सरकार के समर्थकों का कहना है कि मदद कभी भी दी जाए, अगर उससे पीड़ित परिवार को राहत मिलती है, तो यह हमेशा एक सही और जिम्मेदारी भरा कदम है।
बांग्लादेश की जनता की नजर अब आने वाले चुनाव पर टिकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दीपू चंद्र दास की मौत के बाद सरकार की यह बड़ी आर्थिक सहायता जनता पर कितना असर डालती है, और मतदाता इसे मानवीय कदम मानते हैं या राजनीतिक चाल।









