पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में सुनामगंज जिले में जॉय महापात्रो नामक एक हिंदू शख्स की पूर्व-नियोजित हमले में मौत हो गई, जिसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल और गहरा गया है। परिवार का दावा है कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था। ये घटनाएं सिर्फ भीड़ की हिंसा हैं या इसके पीछे कोई बड़ा एजेंडा काम कर रहा है, यह सवाल लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहा है।
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जॉय महापात्रो की हत्या से पहले दीपू चंद्रदास और अमृत मंडल समेत कई अन्य हिंदू अल्पसंख्यकों को भी इसी तरह की हिंसक घटनाओं में मार दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार, हाल ही के दिनों में अकेले एक महीने के भीतर 51 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें हत्या, आगजनी, लूटपाट और झूठे आरोपों पर हमले शामिल हैं। इनमें 10 हत्याएं, 23 आगजनी के मामले और 10 डकैती व चोरी की घटनाएं शामिल थीं। इसके अलावा, कई मामलों में हिंदुओं को झूठे आरोपों में हिरासत और यातना का भी सामना करना पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे भीड़ की हिंसा और स्थानीय प्रशासन की असफलता दोनों जिम्मेदार हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों को पर्याप्त सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रही है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि हिंदू समुदाय लगातार असुरक्षित महसूस कर रहा है। मानवाधिकार संगठन लगातार इन घटनाओं पर चिंता जता रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि यदि इन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में इसके और गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
भारत सरकार लगातार बांग्लादेश में इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और कई बार बयान जारी कर चुकी है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर घटना पर ध्यान रखा जा रहा है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय हिंदू अल्पसंख्यकों के परिवारों का कहना है कि उन्हें अब भारत से सक्रिय कूटनीतिक हस्तक्षेप की उम्मीद है, क्योंकि बांग्लादेश सरकार के दावों के बावजूद हिंसा अभी भी बढ़ रही है और समुदाय लगातार डर के माहौल में जीने को मजबूर है।
मृतकों के परिवारों का दर्द, बढ़ते हमले और डर का माहौल यह स्पष्ट करता है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय निगरानी और भारत के कूटनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।








