बांग्लादेश में बड़ा सियासी तूफान: तारिक रहमान की वापसी से चीन को झटका, भारत को ‘सिल्वर लाइनिंग’

बांग्लादेश में बड़ा सियासी तूफान
बांग्लादेश में बड़ा सियासी तूफान

पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में हाल ही में आए बड़े उलटफेर ने न केवल ढाका, बल्कि नई दिल्ली और वाशिंगटन तक हलचल मचा दी है। अंतरिम सरकार के दौर की समाप्ति के बाद, खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया है। इस सत्ता परिवर्तन ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने के संदर्भ में।

शेख हसीना के देश छोड़कर भारत जाने के बाद, पिछले कुछ महीनों में चीन ने बांग्लादेश में अपनी पैठ तेजी से बढ़ाई थी। बीजिंग ने रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए और यहां तक कि भारत की सीमा के पास ड्रोन फैक्ट्री लगाने की योजना भी बना ली थी। बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तान से JF-17 थंडर फाइटर जेट खरीदने की चर्चाएं भी जोरों पर थीं। हालांकि, तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की राह साफ होते ही, अमेरिकी रणनीति ने इस चीनी दबदबे को खत्म करने की तैयारी कर ली है।

अमेरिकी राजदूत ब्रेंट टी. क्रिस्टेंसन ने हाल ही में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अब बांग्लादेश को उन्नत अमेरिकी और सहयोगी देशों के डिफेंस सिस्टम देने के लिए तैयार है। यह सीधा कदम बांग्लादेश की चीनी हथियारों पर निर्भरता को खत्म करने के लिए उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखना चाहती है और उनका उद्देश्य भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को फिर से मजबूत करना है। शेख हसीना के जाने के बाद जो वीजा सेवाएं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ठंडे बस्ते में चले गए थे, उनके भी फिर से शुरू होने की प्रबल संभावना है।

भारत के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ी ‘उम्मीद की किरण’ (सिल्वर लाइनिंग) लेकर आया है। यदि बांग्लादेश चीनी खेमे से बाहर निकलकर अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को अपनाता है, तो इससे चीन-पाकिस्तान का सैन्य गठजोड़ कमजोर होगा। इसका सीधा असर भारत की सीमा सुरक्षा पर होगा, जो पहले से अधिक मजबूत होगी। इसके अलावा, व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलने वाले हैं, और कई अमेरिकी कंपनियां अब बांग्लादेश में बड़े निवेश की तैयारी में हैं।

मोहम्मद यूनुस का दौर भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन बांग्लादेश में आया यह राजनीतिक बदलाव भारत के लिए रणनीतिक मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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