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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: 17 साल बाद तारिक रहमान की वापसी, भारत के लिए क्या हैं नई चुनौतियाँ?

बात करेंगे पड़ोसी देश बांग्लादेश की,

17 साल के लंबे इंतजार के बाद पड़ोसी देश बांग्लादेश में सत्ता का पूरा समीकरण बदल चुका है। तारिक रहमान की पार्टी BNP ने 300 में से लगभग 206 सीटें जीतकर शानदार वापसी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर तारिक रहमान को बधाई तो दी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बदलाव से भारत के साथ रिश्तों की पुरानी मिठास लौट पाएगी, या नई दिल्ली के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर नई परेशानियां खड़ी होने वाली हैं? आइए जानते हैं तीन बड़े मुद्दे जो भारत की चिंता बढ़ा रहे हैं।

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। ये वो तीन प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर भारत को अब विशेष ध्यान देने की जरूरत है:

1. चीन-पाकिस्तान के साथ बढ़ता गठबंधन और क्षेत्रीय सुरक्षा

शेख हसीना के कार्यकाल में भारत लगभग निश्चिंत था क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान से दूरी बनाए रखी थी। हालांकि, पूर्व अंतरिम सरकार (मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व) के दौरान ही ढाका का झुकाव बीजिंग और इस्लामाबाद की तरफ बढ़ने लगा था। अब मुख्य चिंता यह है कि क्या तारिक रहमान भी इसी रास्ते पर चलेंगे? अगर बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए होता है, तो यह हमारी क्षेत्रीय अखंडता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। यह खतरा पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले बेहद संवेदनशील ‘चिकन नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) इलाके के लिए विशेष रूप से गंभीर है।

2. घुसपैठ, उग्रवाद और आंतरिक स्थिरता पर असर

अगर बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतें दोबारा मजबूत होती हैं, तो इसका सीधा परिणाम सीमा पार से अवैध घुसपैठ और उग्रवाद में वृद्धि हो सकता है। भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) पर होने वाले हमलों ने हमेशा से ही भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं। इसका सीधा असर पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों की घरेलू राजनीति और शांति व्यवस्था पर पड़ता है।

3. व्यापार संबंध और बजट में कटौती की कड़वाहट

भारत और बांग्लादेश के बीच 10 अरब डॉलर से अधिक का मजबूत कारोबार होता है। भारत वहां की गारमेंट इंडस्ट्री को 80% से ज्यादा कच्चा कपास उपलब्ध कराता है, जो आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, रिश्तों में आई खटास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत सरकार ने हाल ही में पेश किए गए बजट में बांग्लादेश को दी जाने वाली सहायता में 50% की भारी कटौती कर दी है। यह कटौती साफ इशारा है कि भारत अब कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग के मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।

हालांकि तारिक रहमान ने सार्वजनिक तौर पर यह वादा किया है कि वे ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति अपनाएंगे और साथ ही भारत के हितों का सम्मान करेंगे, लेकिन ये सिर्फ चुनावी वादे हैं या हकीकत, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, भारत के लिए यह स्थिति ‘इंतजार करो और देखो’ (वेट एंड वॉच) की बनी हुई है।

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