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बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव, मिर्जा फखरुल और ओली अहमद के बीच मुकाबला

बांग्लादेश की राजनीति में आज बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। देश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए सीधा चुनाव हो रहा है।
बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव, मिर्जा फखरुल और ओली अहमद के बीच मुकाबला

बांग्लादेश की राजनीति में आज बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। देश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए सीधा चुनाव हो रहा है। इस बार राष्ट्रपति की कुर्सी के लिए सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद आमने-सामने हैं। संसद में होने वाले इस चुनाव में BNP के मजबूत बहुमत को देखते हुए आलमगीर को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

संसद में होगा राष्ट्रपति चुनाव

निर्वाचन आयोग के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान जातीय संसद में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र 16 अगस्त को जांच के बाद मंजूर किए जा चुके हैं। बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती, बल्कि संसद सदस्य मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

1991 के बाद पहली बार आमने-सामने उम्मीदवार

बांग्लादेश में 1991 के बाद यह पहला मौका है जब राष्ट्रपति चुनाव में दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है। पिछले कई दशकों में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अक्सर निर्विरोध या सर्वसम्मति से होता रहा है। ऐसे में इस बार का मुकाबला देश की राजनीति में खास महत्व रखता है।

कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर?

78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर BNP के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह पार्टी में संयुक्त महासचिव, कार्यवाहक महासचिव और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पार्टी के मुश्किल दौर में उन्होंने संगठन को संभालने में अहम भूमिका निभाई है।

राष्ट्रपति चुनाव से पहले BNP की संसदीय दल की बैठक में आलमगीर ने पार्टी सांसदों से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने सांसदों से कहा कि अगर उनसे कभी कोई गलती हुई हो या अनजाने में किसी को ठेस पहुंची हो तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। बैठक के दौरान उनके भावुक होने की बात भी सामने आई है।

ओली अहमद भी मजबूत चुनौती देने की तैयारी में

आलमगीर के सामने 84 वर्षीय ओली अहमद हैं। वह लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष हैं और इस बार 11 दलों के विपक्षी गठबंधन की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाए गए हैं।

सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय हैं। हालांकि संसद में सत्तारूढ़ BNP के मजबूत बहुमत के कारण उनके सामने चुनौती काफी बड़ी मानी जा रही है।

BNP के पास दो-तिहाई बहुमत

12 फरवरी को हुए आम चुनाव के बाद BNP सत्ता में आई थी। पार्टी के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।

अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वह बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति बन सकते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद हो रहा चुनाव

यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद कराया जा रहा है। उन्होंने पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका पांच साल का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था।

संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति पद खाली होने के बाद 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाना जरूरी है। फिलहाल राष्ट्रपति पद खाली होने के बाद संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

शुक्रवार को हो सकता है शपथ ग्रहण

संसद सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवार का शपथ ग्रहण शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में हो सकता है। इसके साथ ही बांग्लादेश को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा।

राष्ट्रपति के पास कितनी शक्तियां?

बांग्लादेश की संसदीय व्यवस्था में राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। राष्ट्रपति के पास प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार हैं। इसके अलावा वह देश की सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर भी होते हैं।

हालांकि, व्यवहार में राष्ट्रपति इन अधिकारों का इस्तेमाल आमतौर पर प्रधानमंत्री की सलाह के अनुसार करते हैं। इसलिए संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति का पद महत्वपूर्ण होने के बावजूद देश की वास्तविक कार्यकारी शक्ति मुख्य रूप से प्रधानमंत्री के पास रहती है।

35 साल बाद का मुकाबला क्यों अहम?

बांग्लादेश में 35 साल बाद हो रहा यह सीधा राष्ट्रपति चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। हालांकि संसद में BNP के मजबूत बहुमत के कारण आलमगीर का पलड़ा भारी माना जा रहा है, लेकिन चुनाव का सीधा मुकाबला होना अपने आप में बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।

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