पटना: बिहार की राजनीति में शुक्रवार (31 जुलाई, 2026) को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश का मंत्री पद बरकरार रखने के लिए बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
देवेश कुमार राज्यपाल कोटे से विधान परिषद (MLC) के सदस्य थे। उनके कार्यकाल के करीब आठ महीने अभी बाकी थे। इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर अब दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने की तैयारी है, जिससे उनका मंत्री पद संवैधानिक रूप से सुरक्षित रहेगा।
सभापति को सौंपा गया इस्तीफा
जानकारी के अनुसार, बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विधान परिषद के सभापति को देवेश कुमार का इस्तीफा सौंपा। इस दौरान देवेश कुमार भी मौजूद रहे। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया जा सकेगा।
क्यों जरूरी था MLC बनना?
दीपक प्रकाश को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी, जबकि वह उस समय विधानसभा या विधान परिषद—किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।
संविधान के अनुसार, मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है, अन्यथा मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। इसी संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए अब उन्हें विधान परिषद भेजने की तैयारी की जा रही है।
मंत्री पद रहेगा बरकरार
देवेश कुमार के इस्तीफे से विधान परिषद की सीट खाली हो गई है। अब इस सीट पर दीपक प्रकाश के निर्वाचित होने का रास्ता साफ माना जा रहा है। उनके एमएलसी बनने के बाद बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल जारी रहेगा।