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BMC मेयर चुनाव: 11 फरवरी को होगा फैसला, मुंबई की सत्ता की चाबी किसके हाथ?

BMC मेयर चुनाव

मुंबई। देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में चार साल बाद एक बार फिर सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी, इसका फैसला कुछ ही दिनों में होने वाला है। 15 जनवरी को पड़े वोटों के बाद अब सभी की निगाहें 11 फरवरी पर टिकी हैं, जब 78वें मेयर पद के लिए चुनाव होंगे। यह चुनाव सिर्फ एक पद का फैसला नहीं, बल्कि मुंबई की राजनीतिक रणनीति और गठबंधन की ताकत का सबसे बड़ा इम्तिहान है, जिसका वार्षिक बजट कई छोटे राज्यों से भी बड़ा होता है।

बीएमसी में 78वें मेयर पद के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मेयर का पद सामान्य वर्ग की महिला पार्षद के लिए आरक्षित है, जिसका मतलब है कि मुंबई को जल्द ही एक महिला मेयर मिलने वाली हैं। 227 कॉर्पोरेटर अपना वोट देंगे और जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे, वह 78वीं बीएमसी मेयर बनेंगी।

मुंबई की सत्ता का समीकरण फिलहाल गठबंधन के पक्ष में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बीएमसी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। दोनों दलों का गठबंधन 118 सीटों पर है, जो बहुमत के आंकड़े (114) से काफी ऊपर है।

वहीं, विपक्षी खेमे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 65 सीटें, कांग्रेस को 20, राज ठाकरे की मनसे को 6 सीटें और अन्य छोटे दलों को भी कुछ सीटें मिली हैं। विपक्ष भले ही इस मजबूत गठबंधन को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा आंकड़े सत्ताधारी दलों को मजबूत दिखाते हैं।

मेयर और डिप्टी मेयर पदों को लेकर बीजेपी और शिंदे सेना के बीच अंदरूनी राजनीतिक खींचतान जारी है। शिवसेना (शिंदे गुट) ने मांग की है कि अगर उन्हें बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है, तो महापौर पद कम से कम 1 साल 3 महीने के लिए उनके हिस्से में रहना चाहिए। हालांकि, अंतिम फार्मूला अभी तक तय नहीं हुआ है। नामांकन पत्र 7 फरवरी से दाखिल होंगे और 11 फरवरी को वापस लिए जा सकते हैं। उसी दिन दोपहर 12 बजे मतदान होगा। मेयर चुनाव के बाद, 16 फरवरी को अहम समितियों के अध्यक्षों के चुनाव भी होने की संभावना है।

यह मेयर पद राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है क्योंकि बीएमसी देश की सबसे समृद्ध और शक्तिशाली नगर निगमों में से एक है। 11 फरवरी को होने वाला फैसला न केवल मुंबई को उसका नया नेतृत्व देगा, बल्कि महाराष्ट्र की गठबंधन राजनीति के अगले अध्याय की भी शुरुआत करेगा।