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BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटेगी दुनिया की बड़ी ताकतें, गुटेरेस से पुतिन-जिनपिंग तक की मौजूदगी पर नजर

नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit 2026 इस बार वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, इस बैठक में दुनिया के कई बड़े नेता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
BRICS Summit 2026
BRICS Summit 2026

नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit 2026 इस बार वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस बैठक में दुनिया के कई बड़े नेता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचेंगे। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शामिल होने की संभावना है।

गुटेरेस की मौजूदगी से बढ़ेगा सम्मेलन का कद

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का इस साल भारत का यह दूसरा अहम दौरा होगा। वह फरवरी 2026 में इंडिया-AI इंपैक्ट समिट में भी शामिल हुए थे। BRICS सम्मेलन में उनकी मौजूदगी ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और उससे जुड़े मानवीय एवं आर्थिक प्रभाव वैश्विक चिंता का विषय बने हुए हैं।

गुटेरेस ने हाल ही में SCO सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया था। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात कही थी।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत की बड़ी परीक्षा

BRICS बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकता है। भारत की कोशिश है कि सदस्य देशों के बीच सहमति बनाकर एक संयुक्त बयान जारी किया जाए। हालांकि, ईरान द्वारा अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई का मुद्दा उठाए जाने की संभावना के चलते इस पर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा है।

ईरान इस मुद्दे पर BRICS के अन्य देशों से समर्थन की मांग कर सकता है। दूसरी ओर चीन और रूस के ईरान के साथ करीबी संबंध होने के कारण इस मुद्दे पर समूह के भीतर अलग-अलग राय सामने आने की संभावना है। ऐसे में भारत के सामने चुनौती होगी कि वह सभी सदस्य देशों को ऐसी भाषा पर सहमत कराए, जो किसी एक पक्ष के सीधे समर्थन या विरोध के बजाय व्यापक सहमति को दर्शाए।

क्या BRICS में डॉलर को लेकर कोई बड़ा फैसला होगा?

पश्चिम एशिया के अलावा अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का मुद्दा भी BRICS के एजेंडे में चर्चा का विषय बन सकता है। BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में आपसी कारोबार बढ़ाने और व्यापार को मजबूत करने की कोशिशें लंबे समय से जारी हैं।

हालांकि, भारत की कोशिश यह भी बताने की है कि उसकी BRICS अध्यक्षता को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ किसी मंच के तौर पर पेश न किया जाए। इसलिए डॉलर से जुड़े किसी भी प्रस्ताव और पश्चिम एशिया पर बयान को लेकर भाषा और रुख दोनों बेहद संतुलित रहने की संभावना है।

पुतिन और जिनपिंग पर भी दुनिया की नजर

दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है, हालांकि उनकी यात्रा को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी बताई गई है।

अगर ये सभी नेता सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मंच बन सकती है। खासकर पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर बड़े देशों के बीच बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

चौथी बार भारत के हाथ में BRICS की कमान

भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में समूह की अध्यक्षता कर चुका है। इस साल BRICS की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं, जिससे भारत की अध्यक्षता और दिल्ली सम्मेलन का महत्व और बढ़ जाता है।

भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के लिए ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को थीम बनाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अध्यक्षता के दौरान देश के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

अब सबकी नजर 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन पर है, जहां भारत को वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने की चुनौती का सामना करना होगा।

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