भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में सरकार जल्द ही अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। देश में BS7 यानी Bharat Stage 7 उत्सर्जन मानकों का ड्राफ्ट जल्द जारी किया जा सकता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव वी. उमाशंकर के मुताबिक, BS7 के ड्राफ्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे अगले कुछ महीनों में सामने लाए जाने की उम्मीद है।
BS7 में क्या होगा खास?
BS7 को मौजूदा BS6 उत्सर्जन मानकों से ज्यादा सख्त बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों पर नियंत्रण बढ़ाना और वास्तविक सड़क परिस्थितियों में वाहनों के उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत करना है। प्रस्तावित नियम यूरोप के Euro 7 मानकों से प्रेरित होंगे, लेकिन इन्हें भारत की सड़क, यातायात और ईंधन संबंधी परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया जाएगा।
रियल टाइम एमिशन मॉनिटरिंग पर जोर
BS7 में केवल लैब टेस्ट के आधार पर वाहन के उत्सर्जन का आकलन करने के बजाय वास्तविक ड्राइविंग परिस्थितियों में प्रदूषण की निगरानी पर ज्यादा जोर दिए जाने की संभावना है। इसका मतलब है कि वाहन अलग-अलग परिस्थितियों में चलते समय तय उत्सर्जन सीमा के भीतर रहें, इस पर ज्यादा कड़ी नजर रखी जा सकती है।
CNG वाहनों पर भी बढ़ेगा फोकस
प्रस्तावित BS7 नियमों में पेट्रोल और डीजल वाहनों के साथ-साथ प्राकृतिक गैस यानी CNG से चलने वाले वाहनों के उत्सर्जन को भी ज्यादा सख्ती से नियंत्रित किए जाने की संभावना है। रिपोर्टों के मुताबिक, CNG वाहनों से निकलने वाले कुछ प्रदूषकों पर पहली बार ज्यादा स्पष्ट और कड़े नियंत्रण लागू किए जा सकते हैं। अमोनिया जैसे प्रदूषकों की निगरानी भी नए नियमों का हिस्सा हो सकती है।
EVs के लिए भी बदल सकता है फोकस
BS7 को सिर्फ पेट्रोल, डीजल या CNG वाहनों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। आधुनिक उत्सर्जन नियमों में वाहन के ब्रेक और टायर से निकलने वाले कणों पर भी ध्यान बढ़ रहा है। Euro 7 व्यवस्था में ब्रेक से निकलने वाले पार्टिकुलेट और टायरों से होने वाले माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को भी नियमों के दायरे में लाया गया है। इलेक्ट्रिक वाहन भी इन गैर-एग्जॉस्ट उत्सर्जन पहलुओं से पूरी तरह बाहर नहीं हैं।
कब लागू होंगे BS7 नियम?
भारत में फिलहाल BS6 उत्सर्जन मानक लागू हैं, जो अप्रैल 2020 में देशभर में लागू हुए थे। BS7 को लेकर सरकार की तैयारी तेज हो गई है, लेकिन अंतिम नियम, लागू होने की तारीख और अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए समयसीमा आधिकारिक ड्राफ्ट और उसके बाद की अधिसूचना से स्पष्ट होगी। कुछ रिपोर्टों में 2027 से नए वाहनों पर कड़े BS7 प्रावधान लागू होने की संभावना जताई गई है, लेकिन इसे अंतिम समयसीमा नहीं माना जाना चाहिए।
कार और बाइक खरीदने वालों पर क्या होगा असर?
BS7 लागू होने के बाद वाहन कंपनियों को अपने मॉडल में ज्यादा एडवांस एमिशन-कंट्रोल तकनीक और मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे वाहन निर्माण की लागत बढ़ने की संभावना है, जिसका असर भविष्य में नई कारों और दोपहिया वाहनों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ, सख्त नियमों से वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत में BS6 से BS7 की ओर बढ़ना ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा नियामकीय बदलाव होगा। हालांकि, अंतिम तस्वीर BS7 के आधिकारिक ड्राफ्ट के सामने आने के बाद ही साफ होगी कि सरकार उत्सर्जन सीमा, टेस्टिंग, रियल-वर्ल्ड मॉनिटरिंग और वाहन निर्माताओं के लिए अनुपालन से जुड़े नियमों को किस तरह लागू करती है।