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CWC बैठक में दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल, संगठन को लेकर अचानक क्यों छलका दर्द?

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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में संगठन के कामकाज को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में केंद्रीकरण का मुद्दा गंभीर है और संगठन में सुधार की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, कई बार प्रदेशों में अध्यक्ष तो बनाए जाते हैं, लेकिन उनके साथ काम करने वाली कमेटियां नहीं बनती, जिससे संगठन का काम सुचारू रूप से नहीं चल पाता।

दिग्विजय सिंह का यह बयान राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठाने के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने सीधे राहुल गांधी को टैग करते हुए एक्स हैंडल पर लिखा कि सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर उनके काम की सराहना की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब कांग्रेस के संगठन पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उनका मानना है कि संगठन को डिसेंट्रलाइज्ड यानी विकेन्द्रीकृत तरीके से काम करना चाहिए, ताकि फैसले सिर्फ केंद्र तक सीमित न रहें और प्रदेशों में भी सुधार और जिम्मेदारी आए।

दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन सिर्फ इसके शुरू होने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने राहुल गांधी को विश्वास दिलाया कि उन्हें यह काम पूरा करने की क्षमता है, बस यह जरूरी है कि पार्टी के अन्य नेताओं को समझाया और मनाया जाए। पोस्ट के अंत में उन्होंने भावुकता के साथ “जय सिया राम” लिखा।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की निंदा की और कहा कि यह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। खरगे ने नेताओं से आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने की साजिश बताया और कहा कि इसे रोकने के लिए कांग्रेस को सतर्क रहना होगा, ताकि मतदाताओं के नाम काटे न जाएं।

खरगे ने हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार की नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि MGNREGA जैसे कार्यक्रम को समाप्त कर करोड़ों गरीबों और कमजोर तबके के लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे गरीबों के साथ अन्याय और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अपमान बताया।

इस तरह, बैठक में दोनों नेताओं ने पार्टी के संगठन सुधार और देश के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर अपनी चिंता जताई। दिग्विजय सिंह ने संगठन के विकेंद्रीकरण पर जोर दिया, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे ने जनता के अधिकार और सरकार की नीतियों पर चेतावनी दी।

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