नई दिल्ली। महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती पर सोमवार को देशभर में उन्हें याद किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई नेताओं ने भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया। देश के अलग-अलग हिस्सों में भी उनके जन्मदिवस पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।
PM मोदी ने भगत सिंह को किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगत सिंह की जयंती पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने उनके साहस और शौर्य को याद करते हुए कहा कि भगत सिंह ने आजादी के आंदोलन को नई धार दी थी। प्रधानमंत्री ने उनके बलिदान की भावना को देश के युवाओं के लिए साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी भगत सिंह की जयंती पर यह संदेश जारी किया गया।
ओम बिरला ने बताया युवाओं की चेतना का प्रतीक
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी भगत सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भगत सिंह को युवा चेतना, वैचारिक साहस और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बताया। ओम बिरला ने भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों, देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।
दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने भी दी श्रद्धांजलि
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भगत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए उनके जीवन को साहस, देशभक्ति और कर्तव्य भावना से जोड़कर याद किया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह का जीवन आने वाली पीढ़ियों में देशभक्ति की भावना जगाता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी भगत सिंह को युवाओं के लिए प्रेरणा बताया और उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
पंजाब में ‘जश्न-ए-इंकलाब’ कार्यक्रम
भगत सिंह की जयंती के अवसर पर पंजाब में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में ‘जश्न-ए-इंकलाब’ नाम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं बड़ी संख्या में लोग शहीद भगत सिंह नगर जिले के खटकड़ कलां स्थित उनके पैतृक गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
28 सितंबर 1907 को हुआ था जन्म
भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को तत्कालीन पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था। यह स्थान अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा हुआ था और कम उम्र में ही भगत सिंह पर देश की आजादी और क्रांतिकारी विचारों का प्रभाव पड़ा।
23 साल की उम्र में दी शहादत
भगत सिंह ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। 8 अप्रैल 1929 को उन्होंने बटुकेश्वर दत्त के साथ दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका और बाद में गिरफ्तारी दी। लाहौर षड्यंत्र मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई। उस समय भगत सिंह की उम्र केवल 23 वर्ष थी।
देशभर में याद किए गए शहीद भगत सिंह
भगत सिंह की जयंती पर दिल्ली से लेकर पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। राजनीतिक नेताओं के साथ आम लोगों और विभिन्न संगठनों ने भी उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया। 119वीं जयंती के मौके पर भगत सिंह के साहस, विचारों और देश के स्वतंत्रता संघर्ष में उनकी भूमिका को प्रमुखता से याद किया गया।