राजस्थान के दौसा जिले से एक शर्मनाक घटना सामने आई है जहा पर एक 16 वर्षीय गर्भवती नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है. आरोपियों की हैवानियत इतनी की उन सब ने ये नहीं सोच की वो नाबालिक गर्भवती है. आरोप है कि तीनों ने उसे किडनैप किया फिर बारी बारी से उसका गैंगरैप किया. इसी दौरान पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया. वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को कलेक्ट्रेट चौराहे पर छोड़कर भाग गए. पीड़िता किसी तरह कपड़ों में लिपटी नवजात को लेकर अस्पताल पहुंची. अस्पताल में जांच के बाद नवजात को मृत घोषित कर दिया गया. पीड़िता को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
प्रसव के दर्द के बीच सामूहिक दुष्कर्म
घटना के दौरान पीड़िता को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और उसने एक बच्ची को जन्म दिया. आरोपियों के उसे कलेक्ट्रेट चौराहे के पास छोड़कर फरार होने की बात सामने आई है. इसके बाद पीड़िता ने वहां मौजूद एक व्यक्ति से मदद मांगी. सहायता मिलने पर वह नवजात को कपड़े में लपेटकर अस्पताल पहुंची, जहां चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया.
फरवरी और मई में भी शोषण के आरोप
इस मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि एक आरोपी ने फरवरी और मई 2026 में भी नाबालिग का यौन शोषण किया था. बताया जा रहा है कि पीड़िता इसी अवधि के दौरान गर्भवती हुई थी. हालांकि, इन आरोपों और घटनाक्रम की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी. जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि अपराध में कौन-कौन शामिल था और पहले की घटनाओं से उसका क्या संबंध है.
अस्पताल पहुंची पुलिस, बयान दर्ज करने की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने के बाद कोलवा थाने के थानाधिकारी मनोहर लाल दौसा जिला अस्पताल पहुंचे. पुलिस पीड़िता के बयान दर्ज करने और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करने की प्रक्रिया में जुटी है. पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस घटना की परिस्थितियों और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल करेगी. मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार की जाएगी.
नाबालिग की सुरक्षा और जांच पर नजर
यह मामला नाबालिग की सुरक्षा, कथित यौन हिंसा और समय पर सहायता मिलने जैसे गंभीर सवाल उठाता है. फिलहाल पीड़िता अस्पताल में उपचाराधीन है और नवजात की मौत की पुष्टि हुई है. पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना किस क्रम में हुई, पीड़िता के साथ पहले क्या हुआ था और आरोपियों ने किस तरह से इस अपराध को अंजाम दिया. नाबालिग की पहचान गोपनीय रखना और उसे आवश्यक चिकित्सकीय तथा मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराना इस मामले में बेहद जरूरी है।