ब्रजभूमि में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर एक बड़ी मांग ने धार्मिक और सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय द्वारा उठाई गई इस मांग को अब श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास का भी पुरजोर समर्थन मिल गया है। न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने इस संबंध में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एयरपोर्ट का नाम बदलने की अपील की है, जिसके बाद यह मुद्दा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जेवर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का नाम ‘योगेश्वर श्री कृष्णा एयरपोर्ट’ किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। श्री कृष्ण जन्म भूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजे अपने पत्र में मजबूत तर्क पेश किए हैं। उनका कहना है कि यह एयरपोर्ट मथुरा (भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि) और दिल्ली/इंद्रप्रस्थ (भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि) के ठीक मध्य स्थित है। ऐसे में, यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने तर्क दिया है कि नाम बदलने से सनातन संस्कृति को उचित सम्मान मिलेगा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि: यदि एयरपोर्ट का नाम भगवान श्री कृष्ण के नाम पर रखा जाता है, तो देश-विदेश से आने वाले सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था को बल मिलेगा।
यह नामकरण सीधे ब्रज क्षेत्र की धार्मिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करेगा, जिससे मथुरा आने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
इस प्रमुख मांग के साथ ही, दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री से एक और महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा पाठ्यक्रम में पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उनका विश्वास है कि ऐसा करने से युवा पीढ़ी नैतिक मूल्यों से जुड़ेगी, धर्मांतरण जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी और युवा मांस-मदिरा जैसी बुराइयों से दूर रह सकेंगे।
फिलहाल, इस संवेदनशील और सांस्कृतिक मांग को लेकर ब्रज क्षेत्र के लोगों में उत्साह है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण और शिक्षा पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है।








