नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, जहां एनडीए सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। संसद परिसर में उन्हें पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया और “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए गए। इस दौरान कई सांसद उन्हें घेरे हुए संसद भवन के अंदर लेकर गए। राजनीतिक हलकों में इस स्वागत को भाजपा और एनडीए की ओर से यह संदेश माना जा रहा है कि इस्तीफे के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान का पार्टी में सम्मान और राजनीतिक महत्व बरकरार है।
इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखे धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा था कि देश का युवा ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और छात्रों के हित सर्वोपरि हैं। इस्तीफे के बाद संसद में उनकी मौजूदगी ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 संसद में पेश कर रही है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सदन में पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष का हंगामा
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस देकर इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की।
लोकसभा में कई सांसदों ने दिया स्थगन प्रस्ताव
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, मणिकम टैगोर, हिबी ईडन और विजयकुमार उर्फ विजय वसंत ने लोकसभा में अलग-अलग स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिए। सांसदों का आरोप है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। नोटिस में दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन और शॉक बैटन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ की दृष्टि प्रभावित होने की आशंका है।
राज्यसभा में भी उठा मामला
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर छात्र आंदोलन पर कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा की मांग की। वहीं, डीएमके सांसद टीआर बालू ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव देकर नीट परीक्षा प्रणाली की समीक्षा, नीट पर तत्काल रोक लगाने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित रूप से घातक हथियारों के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
संसद में परीक्षा सुधार और छात्र आंदोलन दोनों पर नजर
एक ओर सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए संशोधन विधेयक लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बल प्रयोग को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में संसद के मौजूदा सत्र में परीक्षा सुधार और छात्र आंदोलन दोनों प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने हुए हैं।