गुवाहाटी: असम में हालिया भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमन्त विश्व शर्मा ने घोषणा की है कि शिवसागर और चराइदेव जिलों के किसानों और जमीन मालिकों को एक साल तक भूमि कर (लैंड टैक्स) नहीं देना होगा। इसके साथ ही बिजली बिल में छूट, घरों की मरम्मत के लिए आर्थिक सहायता और बीमा दावों के जल्द निपटारे जैसी कई राहतों का भी ऐलान किया गया है।
क्या है लैंड टैक्स?
लैंड टैक्स या भूमि कर वह शुल्क है, जो सरकार जमीन के मालिकों से कृषि, आवासीय या अन्य प्रकार की भूमि पर वसूलती है। बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर और चराइदेव जिलों के लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने 1 अप्रैल से प्रभावी एक वर्ष की टैक्स छूट देने का फैसला किया है।
बिजली बिल में भी बड़ी राहत
राज्य सरकार ने शिवसागर और चराइदेव के उन घरेलू उपभोक्ताओं को भी राहत दी है, जिनकी मासिक बिजली खपत 300 यूनिट तक है।
- 300 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं का जुलाई का बिजली बिल माफ किया जाएगा।
- प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को 300 यूनिट का मुफ्त रिचार्ज मिलेगा।
बीमा दावों का होगा जल्द निपटारा
सरकार ने बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के बाढ़ प्रभावित लोगों के बीमा दावों का जल्द और सरल तरीके से निपटारा किया जाए।
इसके लिए कई कदम उठाए जाएंगे—
- दावों के लिए जरूरी दस्तावेजों की संख्या कम की जाएगी।
- प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
- 24×7 हेल्पलाइन और विशेष सहायता केंद्र शुरू किए जाएंगे।
- जरूरत पड़ने पर घरों और दुकानों का वीडियो सर्वे भी कराया जाएगा।
घरों की मरम्मत के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से बाढ़ प्रभावित परिवारों को घरों की मरम्मत के लिए 15,000 रुपये की अंतरिम सहायता दी जाएगी।
राहत पाने वाले परिवारों की संख्या:
- शिवसागर: लगभग 55,000 परिवार
- चराइदेव: 20,000 परिवार
- जोरहाट: 7,000 परिवार
- गोलाघाट: 3,000 परिवार
सरकार के अनुसार, यह राशि 3 से 5 अगस्त के बीच वितरित की जाएगी। वहीं जिन परिवारों के घर 10 अगस्त तक भी रहने योग्य नहीं बन पाएंगे, उन्हें अतिरिक्त 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
किसानों और जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि लैंड टैक्स माफी, बिजली बिल में राहत और आर्थिक सहायता से बाढ़ प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों पर आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही बीमा दावों के त्वरित निपटारे से लोगों को नुकसान की भरपाई जल्दी मिल सकेगी।