लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक रियल एस्टेट कारोबारी का अपहरण कर लिया। आरोपियों ने कारोबारी को उसकी ही स्कॉर्पियो में बैठाया और करीब 10 घंटे तक अलग-अलग इलाकों में घुमाते हुए उसके साथ मारपीट की। इसके बाद कारोबारी की पत्नी से 13 लाख रुपये और जेवर की फिरौती मांगी गई। रकम मिलने के बाद बदमाश कारोबारी को शहीद पथ के किनारे छोड़कर फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
फर्जी पुलिस आईडी दिखाकर बनाया निशाना
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित कारोबारी सुदर्शन घोष का कृष्णानगर इलाके में रियल एस्टेट का कार्यालय है। 12 सितंबर को वह अपने ऑफिस में मौजूद थे। इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए उन्हें बाहर बुलाया।
बाहर मौजूद आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी का फर्जी पहचान पत्र दिखाया और पूछताछ के नाम पर कारोबारी को उनकी ही स्कॉर्पियो में बैठा लिया। इसके बाद हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया गया और वहां से लेकर चले गए।
लखनऊ से कन्नौज और आगरा तक घुमाते रहे
पुलिस के अनुसार, बदमाश कारोबारी को लेकर शहीद पथ से कानपुर, कन्नौज और फिर आगरा की तरफ गए। इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई और एनकाउंटर की धमकी दी गई। आरोपियों ने कारोबारी के मोबाइल से उनकी पत्नी को फोन किया और जान से मारने की धमकी देते हुए फिरौती की मांग की। कारोबारी की पत्नी ने बदमाशों की मांग के अनुसार 13 लाख रुपये और जेवर एक बैग में रखकर बताए गए स्थान पर भेजे। रकम मिलने के बाद कारोबारी को छोड़ दिया गया।
200 से ज्यादा CCTV कैमरों की जांच
घटना की शिकायत मिलने के बाद कृष्णानगर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने कई टीमों का गठन किया और 200 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी एक और वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं। इसके बाद पुलिस ने शहीद पथ के पास घेराबंदी कर छह संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों के पास से क्या मिला?
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से दो तमंचे, तीन कारतूस, 2.50 लाख रुपये नकद, वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो, दो फर्जी नंबर प्लेट और पुलिस अधिकारियों के चार फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। गिरोह के कथित मास्टरमाइंड समेत कुछ अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है।
कारोबारी के करीबी ने दी थी जानकारी
जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि कारोबारी के एक करीबी व्यक्ति ने कथित तौर पर पैसों के लालच में बदमाशों को कारोबारी की आर्थिक स्थिति और आय के स्रोतों से जुड़ी जानकारी दी थी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह पहले कारोबारी की रेकी करता था और फिर उसकी गतिविधियों तथा आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाकर अपहरण की योजना बनाता था। इस मामले में कारोबारी के करीबी समेत अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।


