Loading...
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
24K Gold
Loading...
Silver (1kg)
Loading...
24K Gold
Loading...
ताज़ा ख़बरें
Loading updates...

होम

शॉर्ट अपडेट

ब्रेकिंग

लाइव टीवी

मेन्यू

‘घूसखोर पंडत’ विवाद: क्यों एक समुदाय को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाता है बॉलीवुड?

‘घूसखोर पंडत’ के नाम पर भड़का जनआक्रोश

देश में इन दिनों एक फिल्म के टाइटल को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है— ‘घूसखोर पंडत’। यह विवाद सिर्फ एक फिल्म के नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने बॉलीवुड में हिंदू समाज और उनकी आस्था को निशाना बनाए जाने के वर्षों पुराने पैटर्न पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक सद्भाव और रचनात्मक स्वतंत्रता (Creative Freedom) की बहस के बीच जनता पूछ रही है कि क्या किसी खास समुदाय को अपमानित करना सस्ती पब्लिसिटी पाने का सबसे आसान तरीका बन गया है?

यह पूरा विवाद इस बुनियादी सवाल से शुरू होता है कि क्या किसी फिल्म की कहानी उसका नाम बदलने से बदल जाएगी? अगर फिल्म का नाम ‘घूसखोर पंडत’ की जगह सिर्फ ‘भ्रष्ट सिस्टम’ रखा जाता, तो भी फिल्म के अंदर के सीन और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की कहानी वही रहती। आलोचकों का मानना है कि जानबूझकर ‘पंडित’ शब्द जोड़कर फिल्म निर्माताओं ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश की, जिससे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

फिल्म जगत का दोहरा चेहरा और निर्माताओं की सफाई

जनता का सबसे बड़ा सवाल फिल्म जगत के कथित दोहरे रवैये पर है। यह आरोप लग रहा है कि फिल्म मेकर्स में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे इसी कहानी को ‘घूसखोर मौलाना’ या ‘घूसखोर पादरी’ नाम से रिलीज़ कर सकें। जब अपमान की बात आती है, तो निशाना सिर्फ एक ही धर्म के समुदाय पर क्यों मुड़ता है?

इस भारी विरोध के बाद, फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे ने सफाई देते हुए कहा कि यह एक ‘काल्पनिक कहानी’ है और ‘पंडित’ शब्द का उपयोग सिर्फ एक किरदार के बोलचाल वाले नाम के तौर पर किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी को ठेस पहुँची है तो वह फिल्म के ट्रेलर और विज्ञापनों को वापस ले रहे हैं। वहीं, फिल्म में भ्रष्ट पुलिस अधिकारी का रोल निभाने वाले एक्टर मनोज वाजपेयी ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए लोगों की भावनाओं को गंभीरता से लेने की बात कही है।

ब्राह्मण मेकर्स पर उठते सवाल और पुरानी परंपरा

हैरानी की बात यह है कि फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और मुख्य अभिनेता मनोज वाजपेयी दोनों कथित तौर पर ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। जनता सवाल कर रही है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि दो ब्राह्मणों ने मिलकर एक ऐसी फिल्म बनाई, जिसमें उनके ही समाज को ‘घूसखोर’ और ‘चरित्रहीन’ दिखाया गया? यह सवाल करता है कि क्या यह सब सिर्फ पैसा कमाने और विवादों में बने रहने का तरीका है। यह पहली बार नहीं है; बॉलीवुड में दशकों से हिंदू किरदारों (जैसे जनेऊ पहनने वाले पंडित) को अक्सर भ्रष्ट और लालची दिखाया जाता रहा है, जबकि अन्य धर्मों के किरदारों को हमेशा ईमानदार और रहमदिल बताया जाता रहा है। पुराने उदाहरणों में 1975 की ‘पोंगा पंडित’ या 2014 की ‘पीके’ जैसी फिल्में शामिल हैं, जिन पर धार्मिक आस्था के अपमान के आरोप लगे थे।

ओटीटी पर अनियंत्रित सामग्री का खतरा

इस विवाद का एक बड़ा कारण यह भी है कि यह ऐसे समय में सामने आया जब देश में UGC के नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग (General Category) पहले से ही गुस्से में था। इस गुस्से वाले माहौल में फिल्म का ट्रेलर आना, लोगों के इस विचार को बल देता है कि एक तरफ उनके हक मारे जा रहे हैं, और दूसरी तरफ उनकी सामाजिक इज्जत को भी फिल्मों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।

आज का सबसे गंभीर मुद्दा ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप का अभाव है। पहले फिल्में सेंसर बोर्ड से गुजरती थीं, लेकिन आज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे Netflix और Amazon पर अश्लीलता, अभद्र भाषा और धर्म का अपमान बिना किसी रोक-टोक के परोसा जा रहा है। सरकार को इस पर लगाम कसनी होगी, क्योंकि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का मतलब किसी की भी आस्था को सरेआम नीलाम करना नहीं हो सकता।

यह विरोध साफ दिखाता है कि भारतीय जनता अब जागरूक हो चुकी है और मनोरंजन के नाम पर किसी भी समुदाय को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाना अब आसान नहीं रहा। फिल्म इंडस्ट्री को समाज की भावनाओं का सम्मान करना होगा, वहीं सरकार और समाज दोनों को मिलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनियंत्रित सामग्री के नियमन पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि हमारी संस्कृति और सद्भाव सुरक्षित रहे।

संबंधित खबरें

लाडकी बहिण योजना में महिलाओं को मिल सकती है बड़ी राहत, केंद्र समिति ने राशि

बारिश में कार वाइपर की कट-कट आवाज से परेशान हैं? नई ब्लेड खरीदने से पहले

US-Iran सीजफायर टूटने के बाद होर्मुज स्ट्रेट और तेल बाजार पर संकट बढ़ा, जिसका सीधा

राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT जांच के बीच बड़ा खुलासा, सूत्रों के मुताबिक नोटों

Nifty में तेजी के संकेत, 24,200-24,300 पार होते ही दिख सकती है शॉर्ट-कवरिंग; 10 जुलाई

सुष्मिता देव, सुखेंदु शेख रॉय और प्रकाश बारिक हुए बीजेपी में शामिल, सियासी हलचल तेज

भारत-इंग्लैंड चौथे T20 में टीम इंडिया के सामने सीरीज बचाने की चुनौती, ब्रिस्टल में जीत

भिलाई के OYO होटल में प्रेमी-प्रेमिका के विवाद के बाद युवक की मौत का मामला

अमेरिका में भारतीय इंजीनियर पर पत्नी की हत्या का आरोप, डिजिटल सबूतों और चैट रिकॉर्ड

‘धमाल 4’ की रिलीज से पहले ही ‘धमाल 5’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया

पश्चिम एशिया (Middle East) एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है, अमेरिका

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग को मजबूत करने