हाल ही में, भारत की राजधानी दिल्ली दुनिया के प्रमुख इस्लामिक और अरब देशों के बड़े नेताओं के जमावड़े का केंद्र बनी। दिल्ली के भारत मंडपम में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की संयुक्त अध्यक्षता में अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब 10 साल बाद हुई इस तरह की उच्च-स्तरीय बैठक को भारत और अरब जगत के बीच गहरे होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
यह अहम बैठक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के मुख्य उद्देश्य के साथ आयोजित की गई थी। भारत और अरब देशों के बीच संबंध सदियों पुराने हैं, जो हाल के वर्षों में आर्थिक मोर्चे पर काफी मजबूत हुए हैं।
भारत अपनी कच्चे तेल, गैस और एलपीजी की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा अरब देशों से आयात करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होती है। दोनों पक्षों के बीच कुल व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक का है, जिसे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। लगभग 90 लाख से अधिक भारतीय नागरिक अरब देशों में कार्यरत हैं, जो दोनों क्षेत्रों के बीच गहरे मानवीय और आर्थिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
बैठक में पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का मुद्दा प्रमुखता से उठा, जिसमें गाजा की मौजूदा स्थिति और वहां शांति बहाल करने पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में मदद करने और फिलिस्तीनी शरणार्थियों का समर्थन करने की अपील की।
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत हमेशा फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा है और ‘दो-राज्य समाधान’ का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि भारत इजराइल और फिलिस्तीन दोनों का मित्र है, इसलिए वह शांति प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भारत की मदद से वेस्ट बैंक में चल रहे कई स्कूलों का उल्लेख किया, हालांकि उन्होंने खेद व्यक्त किया कि गाजा में कुछ स्कूल हालिया संघर्ष में नष्ट हो गए हैं।
यह उच्च-स्तरीय बैठक न केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगी, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को भी वैश्विक मंच पर स्थापित करती है।









