भारत भाग्य विधाता शो का प्रोमो बैनर, जिसमें शो के एंकर Vivek Pathak की तस्वीर दिखाई गई है। इसका प्रसारण सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे Bharat Update पर होता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका से भारत की बड़ी डील, चीन-पाकिस्तान के खिलाफ क्यों खास?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-अमेरिका के रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बीच दोनों देशों के रक्षा संबंधों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है।
ब्रिक्स से पहले भारत का ‘जैवलिन दांव’
ब्रिक्स से पहले भारत का ‘जैवलिन दांव’

Javelin Missile Deal: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-अमेरिका के रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बीच दोनों देशों के रक्षा संबंधों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। भारत ने अमेरिका से करीब 100 जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें खरीदने का फैसला किया है। करीब 45.7 मिलियन डॉलर यानी लगभग 300 करोड़ रुपये की इस डील को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब भारत रूस और चीन के साथ एससीओ और ब्रिक्स जैसे मंचों पर सक्रिय है और साथ ही अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी आगे बढ़ा रहा है।

जैवलिन मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक है। लक्ष्य लॉक होने के बाद मिसाइल को लगातार ऑपरेटर के निर्देश की जरूरत नहीं पड़ती। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से दुश्मन के टैंकों और बंकरों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।

भारत खरीदेगा 100 जैवलिन राउंड और 25 लॉन्च यूनिट

भारतीय सेना ने अमेरिका से जैवलिन मिसाइल सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। Foreign Military Sales (FMS) के तहत भारत करीब 100 जैवलिन मिसाइल राउंड, एक जैवलिन मिसाइल FGM-148 और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट खरीदेगा।

इनके साथ मिसाइल सिस्टम से जुड़े जरूरी उपकरण भी सौदे का हिस्सा होंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस डील को दोनों देशों के रक्षा सहयोग के लिहाज से अहम बताया है।

अमेरिकी रक्षा नेतृत्व की ओर से पहले भी भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। ऐसे में जैवलिन सौदे को उसी दिशा में आगे बढ़ता एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या है जैवलिन मिसाइल की ताकत?

जैवलिन एक आधुनिक मीडियम-रेंज एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसे रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन मिलकर बनाती हैं। अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स के अलावा दुनिया के कई देशों की सेनाएं इसका इस्तेमाल करती हैं।

इस मिसाइल की मारक क्षमता करीब 2.5 किलोमीटर बताई जाती है। इसे एक सैनिक कंधे से या ट्राइपॉड की मदद से लॉन्च कर सकता है।

इसकी ‘फायर एंड फॉरगेट’ क्षमता इसे खास बनाती है। यानी ऑपरेटर लक्ष्य को लॉक करने के बाद मिसाइल लॉन्च कर सकता है और इसके बाद मिसाइल अपने लक्ष्य को खुद ट्रैक करती है। इससे लॉन्च करने वाले सैनिक को तुरंत दूसरी जगह जाने का मौका मिलता है।

LoC से LAC तक क्यों अहम है जैवलिन?

भारत की सुरक्षा चुनौतियां सिर्फ एक सीमा तक सीमित नहीं हैं। पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अलग-अलग परिस्थितियों में सेना को एंटी-टैंक हथियारों की जरूरत पड़ती है।

भारतीय थलसेना पहले से फ्रांस की मिलन और रूस की कोंकर्स जैसी एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल करती है। ऐसे में जैवलिन को इन क्षमताओं के साथ जोड़कर भारतीय सेना अपनी एंटी-टैंक क्षमता को और मजबूत करना चाहती है।

खासकर ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन भूभाग में हल्के और पोर्टेबल एंटी-टैंक सिस्टम पैदल सैनिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल

भारत पहले से कई अमेरिकी रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करता है। भारतीय सेना के पास अमेरिका से हासिल M777 लाइट होवित्जर तोपें भी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन तोपों के इस्तेमाल की रिपोर्ट सामने आई थी।

इसके अलावा भारतीय सैनिक अमेरिकी SIG Sauer राइफलों का भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में जैवलिन की खरीद भारत के मौजूदा अमेरिकी रक्षा उपकरणों के बेड़े में एक और महत्वपूर्ण इजाफा होगी।

अमेरिका ने पहले ही बिक्री को दी थी मंजूरी

अमेरिका की Defense Security Cooperation Agency ने इस संभावित बिक्री को पहले ही मंजूरी दी थी। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता मजबूत करने के साथ दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को भी आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

अमेरिका भारत को हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। उसके मुताबिक, इस तरह की रक्षा बिक्री से भारत की मौजूदा और भविष्य के सुरक्षा खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ सकती है।

भारत में भी बन सकती हैं जैवलिन मिसाइलें

भारत की योजना सिर्फ मिसाइल खरीदने तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में जैवलिन के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना भी जताई जा रही है।

रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ इस दिशा में सहयोग की संभावनाओं पर काम किया है। अगर भारत में उत्पादन आगे बढ़ता है तो इससे भारतीय रक्षा उद्योग को फायदा मिल सकता है और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

हालांकि, BDL खुद भी स्वदेशी अमोघ और MP-ATGM जैसी एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियों पर काम कर रहा है। इसलिए जैवलिन की खरीद को तत्काल सैन्य जरूरत और भविष्य की उत्पादन क्षमता—दोनों से जोड़कर देखा जा सकता है।

रूस-चीन के बीच अमेरिका से जैवलिन डील का क्या संदेश?

इस डील का महत्व सिर्फ हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है। भारत एक तरफ रूस और चीन के साथ ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों पर सक्रिय है, वहीं अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग भी लगातार जारी रखे हुए है।

भारत की विदेश नीति लंबे समय से अलग-अलग शक्तियों के साथ अपने रणनीतिक हितों को संतुलित करने पर केंद्रित रही है। रूस से रक्षा और ऊर्जा संबंध, चीन के साथ सीमा से जुड़े मुद्दे और अमेरिका के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग—इन सभी के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे समय में जैवलिन डील यह संकेत देती है कि भारत अमेरिका के साथ अपने रक्षा संबंधों को भी महत्वपूर्ण मानता है।

ब्रिक्स से पहले डील का रणनीतिक महत्व

ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों पर भारत की सक्रियता के बीच अमेरिका से इतनी बड़ी रक्षा खरीद को रणनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में रूस, चीन और अन्य देशों के शीर्ष नेताओं के साथ भारत की कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ने वाली हैं।

ऐसे में भारत का संदेश साफ दिखाई देता है—रूस और चीन के साथ बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग अपनी जगह है, लेकिन अमेरिका के साथ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

जैवलिन मिसाइलों की खरीद इसलिए सिर्फ 300 करोड़ रुपये की रक्षा डील नहीं है। यह भारत की सैन्य जरूरत, रक्षा आधुनिकीकरण और संतुलित विदेश नीति—तीनों का हिस्सा मानी जा सकती है।

संबंधित खबरें

CM योगी ने कर दिया बड़ा ऐलान! 2 करोड़ युवाओं को टैबलेट, 1 लाख सरकारी नौकरियां

एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर में दिखे नीरज चोपड़ा, क्या हुआ ‘गोल्डन बॉय’ को?

30 अगस्त 2026 राशिफल: मेष से मीन तक जानें कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें शुभ रंग, अंक और क्या करें-क्या न करें

Kawasaki Versys 650 का नया मॉडल भारत में लॉन्च, जाने नए कीमत और फीचर्स

सीएम योगी का सपा पर निशाना, बोले- ‘अच्छी सरकार चुनी जाती है तो काम भी अच्छा होता है’

Recommended Stories

CM योगी ने कर दिया बड़ा ऐलान! 2 करोड़ युवाओं को टैबलेट, 1 लाख सरकारी नौकरियां

एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर में दिखे नीरज चोपड़ा, क्या हुआ ‘गोल्डन बॉय’ को?

30 अगस्त 2026 राशिफल: मेष से मीन तक जानें कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें शुभ रंग, अंक और क्या करें-क्या न करें

Kawasaki Versys 650 का नया मॉडल भारत में लॉन्च, जाने नए कीमत और फीचर्स

सीएम योगी का सपा पर निशाना, बोले- ‘अच्छी सरकार चुनी जाती है तो काम भी अच्छा होता है’