भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की चीन यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे, जहां वह 24वीं भारत-चीन स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (SR) बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान चीन के विदेश मंत्री से उनकी मुलाकात भी संभावित है। बातचीत में मुख्य रूप से भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
डोभाल की चीन यात्रा क्यों अहम?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर SR स्तर की बातचीत लंबे समय से जारी है। खासकर डोकलाम विवाद के बाद इस संवाद का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में अजीत डोभाल की बीजिंग यात्रा को दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की कोशिशों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अजीत डोभाल ऐसे समय चीन पहुंचे हैं, जब आगामी SCO समिट को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर भी नजर है।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
SR बैठक का मुख्य एजेंडा भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय परिस्थितियों और मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया को उस समय गति मिली थी, जब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई। इसके बाद सीमा समेत कई लंबित मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं।
क्या ब्रिक्स के लिए भारत आएंगे शी जिनपिंग?
डोभाल की चीन यात्रा के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत का दौरा करेंगे।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की संभावना के बीच शी जिनपिंग के संभावित दौरे को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, उनके भारत दौरे को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में डोभाल और चीनी नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत के बाद सामने आने वाले बयानों पर सबकी नजर रहेगी।
रूस दौरे पर हैं जयशंकर
इधर, विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी रूस के दौरे पर हैं। वह भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के 27वें सत्र की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
ऐसे में एक ओर डोभाल का चीन दौरा और दूसरी ओर जयशंकर की रूस यात्रा भारत की कूटनीतिक सक्रियता को दिखाती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बीजिंग में होने वाली बातचीत भारत-चीन संबंधों और आगामी शीर्ष स्तरीय मुलाकातों को लेकर क्या संकेत देती है।