भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। व्हाइट हाउस ने इस डील से जुड़ी फैक्ट शीट में चुपचाप बदलाव कर दिया है, जिसने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां पहले भारत द्वारा 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदने के ‘पक्का वादा’ (Commitment) दर्ज था, उसे अब बदलकर सिर्फ ‘इरादा’ (Intend) कर दिया गया है। इसके अलावा, फैक्ट शीट से दालों और कई अन्य कृषि उत्पादों के जिक्र को भी हटा दिया गया है।
ट्रेड डील की बदलती शर्तों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है, जबकि सरकार अपनी तरफ से किसानों के हितों की सुरक्षा का आश्वासन दे रही है।
व्हाइट हाउस के बदलाव और विपक्ष का आरोप
ट्रेड डील विवाद तब गहराया जब व्हाइट हाउस की संशोधित फैक्ट शीट सामने आई। शुरुआती शीट में यह दावा किया गया था कि भारत अमेरिका से दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य कृषि उत्पाद खरीदेगा और कई अमेरिकी सामानों पर लगने वाले टैक्स (टैरिफ) को कम करेगा। नए बदलाव के बाद, $500 बिलियन की खरीद की ‘कमिटमेंट’ को ‘इंटेंड’ में बदल दिया गया है, यानी यह अब पक्का वादा नहीं रहा।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले फैक्ट शीट में दाल और कृषि उत्पादों की खरीद की बात थी, जिसे अब हटा दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देशवासियों को पूरी जानकारी नहीं दे रही है और सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने चुनावी माहौल में लोगों को गुमराह किया।
सरकार का बचाव: किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्रियों ने सफाई पेश की है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ट्रेड डील में देश के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार कभी भी ऐसा समझौता नहीं करेगी, जिससे भारतीय किसानों को किसी भी तरह का नुकसान हो।
वहीं, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस बात की पुष्टि की कि गेहूं, चावल, दाल, डेयरी उत्पाद, सोयाबीन और अन्य जरूरी कृषि उत्पादों पर किसी भी तरह की कोई छूट (कन्सेशन) नहीं दी गई है। सरकार का दावा है कि यह डील राष्ट्रीय हित में है, जिससे व्यापार बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
फिलहाल, इस ट्रेड डील के वास्तविक प्रभाव और शर्तों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले समय में यह साफ हो पाएगा कि भारत सच में अमेरिका से इतना बड़ा व्यापारिक सामान खरीदेगा या यह विवाद सिर्फ कागजी बयानबाजी तक सीमित रहेगा, और सबसे महत्वपूर्ण, भारतीय किसानों के हित कितने सुरक्षित रहेंगे।









