इस वक्त मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी में अब चीन की धमाकेदार एंट्री हो गई है, जिसने वैश्विक भू-राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। अमेरिका को टक्कर देते हुए चीन ने अपने सबसे खतरनाक युद्धपोतों को ईरान की ओर रवाना कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब हॉरमुज़ की खाड़ी में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।
ईरान को अमेरिकी हमले से बचाने के लिए चीन ने कई ताकतवर वॉरशिप्स तैनात किए हैं। सबसे अहम बात यह है कि चीन, ईरान और रूस की नौसेनाएं मिलकर 2 फरवरी को हॉरमुज़ की खाड़ी में एक संयुक्त लाइव फायर मिलिट्री एक्सरसाइज करने जा रही हैं। यह खाड़ी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब, इराक, यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस युद्धाभ्यास को चीन के एक बड़े दांव के तौर पर देखा जा रहा है। चीन अब वह गलती नहीं दोहराना चाहता, जो उसने वेनेजुएला संकट के दौरान की थी, जब अमेरिका के अचानक हमले के समय वह अपने दोस्त देश की मदद नहीं कर पाया था।
मैदान में चीन का Type 055 और अमेरिकी बेड़ा
चीन ने जिस खास वॉरशिप को भेजा है, उसका नाम ‘टाइप 055’ है। इसे दुनिया के सबसे आधुनिक और खतरनाक वॉरशिप्स में गिना जाता है। यह लगभग 13,000 टन का है और इसमें एक बार में 112 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। यह वॉरशिप उसी इलाके में मौजूद है, जहां अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से तैनात है, और दूसरा कैरियर यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट भी जल्द पहुंचने वाला है। अमेरिका सिर्फ समुद्र से ही नहीं, बल्कि इजराइल और जॉर्डन में मौजूद अपने सैन्य ठिकानों से भी ईरान पर हमला करने की तैयारी में है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन को ईरान पर हमले के लिए दो सैन्य विकल्प दिए गए हैं: पहला, न्यूक्लियर साइट्स पर हवाई हमला, और दूसरा, कमांडो भेजकर उन ठिकानों को पूरी तरह तबाह करना।
ईरान की चेतावनी और घातक मिसाइलें
हालांकि, ईरान ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है। ईरान की सेना ने कहा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप यह सोचते हैं कि वे वेनेजुएला की तरह ईरान में कुछ मिनटों या घंटों की कार्रवाई करके जीत हासिल कर लेंगे, तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है। ईरान के पास ‘फतेह’ नामक हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो 6000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमला कर सकती है और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है। अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ईरान की सेना को 1000 नए ड्रोन भी दिए गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री ने बातचीत का स्वागत तो किया है, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या और रेंज को कम करने की अमेरिका की मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है।
मध्य पूर्व में जिस तरह से सैन्य जमावड़ा हो रहा है, उसे देखते हुए यह सप्ताहांत (शनिवार और रविवार) पूरी दुनिया के लिए बेहद तनाव भरा होने वाला है, क्योंकि ईरान संकट पर अमेरिका और चीन का सीधा टकराव संभव है।









