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ईरान संकट: तेहरान में भड़की आग, गोलियों की आवाजें; रजा पहलवी की एक अपील से 31 प्रांतों में विद्रोह, क्या पलटेगा खामेनेई का शासन?

ईरान में तख्तापलट के लिए सड़कों पर उतरते प्रदर्शनकारी और जलते हुए सरकारी वाहन।
ईरान में तख्तापलट के लिए सड़कों पर उतरते प्रदर्शनकारी और जलते हुए सरकारी वाहन।

ईरान इस वक्त एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक तूफान के केंद्र में है। राजधानी तेहरान समेत देश के 31 प्रांतों में भीषण विरोध प्रदर्शन जारी हैं। महंगाई और दमनकारी शासन के खिलाफ भड़की जनता ने सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने गोलीबारी शुरू कर दी है। यह विद्रोह सिर्फ आर्थिक संकट का परिणाम नहीं है, बल्कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के सामने आया सबसे बड़ा अस्तित्वगत संकट है।

तेहरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में गोलियों की आवाज़ें गूंज रही हैं, जहां सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर सीधा फायर कर रहे हैं। गुस्साई भीड़ ने सरकारी गाड़ियों और सुरक्षा बलों की मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक इन हिंसक झड़पों में 45 से अधिक आम लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, पश्चिमी ईरान के केरमानशाह इलाके में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के दो जवानों सहित कुल चार सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। यह स्थिति अब महज़ प्रदर्शन नहीं, बल्कि खुला हिंसक टकराव बन चुकी है।

इस व्यापक विद्रोह का एक बड़ा कारण पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी की अपील है। रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर ईरानी जनता से सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सत्ता हथियाना नहीं, बल्कि ईरान में लोकतंत्र स्थापित करना है। उनकी इस अपील के बाद, लोग खुले तौर पर पहलवी के समर्थन में शाही दौर के झंडे लहराते हुए नज़र आ रहे हैं। यह 1979 की क्रांति के बाद पहली बार है, जब इतनी बड़ी संख्या में लोग मौजूदा इस्लामिक शासन के खिलाफ एक पूर्व शाही वंश के समर्थक के रूप में एकजुट हुए हैं।

प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की नीतियों के खिलाफ हैं और सड़कों पर “तानाशाह की मौत” के नारे लगा रहे हैं। इन विरोधों में सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो दमनकारी नीतियों को खत्म कर व्यक्तिगत आज़ादी की मांग कर रही हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ईरान सरकार ने इंटरनेट और लैंडलाइन फोन सेवाओं को ठप कर दिया है। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद, सड़कों पर उतरी भीड़ को रोक पाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है, और हर गुजरते घंटे के साथ हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं।

ईरान का आधे से ज़्यादा हिस्सा इस वक्त उबाल पर है। खामेनेई शासन के सामने अब यह स्पष्ट हो गया है कि जनता का गुस्सा अब केवल महंगाई तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दमनकारी सिस्टम के खिलाफ फूट पड़ा है, जिससे देश में तख्तापलट की आहट साफ सुनाई दे रही है।

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