ईरान इस वक्त एक विस्फोटक स्थिति से गुजर रहा है। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की 37 साल पुरानी सत्ता के खिलाफ जनता का विद्रोह अब एक महाआंदोलन का रूप ले चुका है। राजधानी तेहरान समेत 100 से अधिक शहरों में लोग सड़कों पर हैं, और पिछले नौ दिनों से जारी यह हिंसक प्रदर्शन खामेनेई की कुर्सी को हिला रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इजरायल ने भी इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है, जिससे मध्य-पूर्व में महायुद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
विद्रोह का बढ़ता दायरा और दमन:- पिछले नौ दिनों से हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जिसमें कारोबारी, छात्र और बड़ी संख्या में महिलाएं (जो काले बुर्के में भी सड़कों पर उतर आई हैं) खामेनेई शासन के अंत की मांग कर रही हैं। यह आंदोलन इतना व्यापक हो चुका है कि 100 से ज्यादा शहरों में आगजनी और विरोध प्रदर्शन की घटनाएं दर्ज की गई हैं। सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एयर स्पेस, इंटरनेट और टेलीफोन लाइनों को बंद कर दिया है। दमनकारी कार्रवाई में अब तक 45 से अधिक लोग मारे गए हैं और 2300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। खबरों के अनुसार, सरकार ने नागरिकों को शांत करने के लिए प्रति माह 7 डॉलर देने का लालच भी दिया है, लेकिन जनता का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है।
अमेरिका और इजरायल की खुली चेतावनी:- इस आंतरिक संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि, “अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम किया गया तो इस बार तानाशाही शासन को उखाड़ फेंका जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हालात पर ‘करीब से नजर’ रख रहा है। इसी बीच, इजरायल ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान जारी कर कहा, “हम ईरानी जनता के संघर्ष और उनकी स्वतंत्रता एवं न्याय की आकांक्षाओं के प्रति सहानुभूति रखते हैं। ईरानी जनता अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथों में लेगी।”
ईरानी सरकार का कड़ा रुख और विदेशी साजिश का आरोप:- विद्रोह को दबाने के लिए खामेनेई ने अपने समर्थक सड़कों पर उतारे हैं, जो ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं। साथ ही, ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजे ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि हिंसा करने वालों से अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और दंगाइयों को सख्ती से दंडित किया जाएगा। वहीं, ईरानी सरकार इन प्रदर्शनों के पीछे इजराइली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ की साजिश बता रही है। इस बीच, ईरान की संसद के अध्यक्ष ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान आत्मरक्षा के लिए किसी से अनुमति नहीं मांगेगा और किसी भी दुस्साहस का अप्रत्याशित जवाब दिया जाएगा।
ईरान में मौजूदा हालात विस्फोटक बने हुए हैं। जनता, जो 37 साल के शासन से मुक्ति चाहती है, सड़कों पर है, जबकि अमेरिका और इजरायल अप्रत्यक्ष रूप से तख्तापलट की योजना पर काम कर रहे हैं। अगर यह संघर्ष युद्ध में तब्दील होता है, तो खामेनेई के लिए स्थिति संभालना असंभव हो जाएगा, और इसका असर न केवल मध्य-पूर्व बल्कि पूरे विश्व की राजनीति पर पड़ना तय है।









