मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भारत समेत अपने मित्र देशों के लिए खोल दिया है। इसका मतलब है कि अब भारतीय जहाज बिना किसी रुकावट के सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि भारत सहित रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान जैसे फ्रेंडली देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी गई है।
UN की अपील के बाद लिया गया फैसला
इस फैसले से पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान से स्ट्रेट खोलने की अपील की थी उन्होंने चेतावनी दी थी कि लंबे समय तक होर्मुज बंद रहने से वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस संकट का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है, जो असुरक्षा और आर्थिक दबाव के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। यूएन लगातार इस युद्ध के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहा है और तत्काल युद्ध खत्म करने की अपील कर चुका है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 55 से 60 प्रतिशत सप्लाई खाड़ी देशों से आती है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है।
देश में रोजाना लगभग 50 लाख बैरल तेल की खपत होती है। इस रास्ते के खुले रहने से सप्लाई चेन बिना बाधा जारी रहेगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी रहेगी।
कीमतों और लागत पर पड़ेगा असर
जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। अब रास्ता खुलने से कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
तनाव के दौरान जहाजों का इंश्योरेंस प्रीमियम 2 से 3 गुना तक बढ़ गया था, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ गई थी। लेकिन हालात सामान्य होने पर इन खर्चों में कमी आएगी।
डिलीवरी टाइम भी होगा बेहतर
मिडिल ईस्ट से भारत आने वाले जहाज अब पहले की तरह 5 से 10 दिनों के भीतर पहुंच सकेंगे। इससे न सिर्फ सप्लाई तेज होगी, बल्कि लॉजिस्टिक सिस्टम भी अधिक कुशल तरीके से काम कर पाएगा। कुल मिलाकर, होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से बड़ी राहत लेकर आया है।









