नई दिल्ली: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा विरोध-प्रदर्शन विवादों में घिर गया है. कैंपस की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे जाने की खबरों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने इस मामले को लेकर विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा और सवाल किया कि राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव अब तक इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं.
‘कौन माई का लाल भारत को तोड़ना चाहता है?’
जामिया में लिखे गए विवादित नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरिराज सिंह ने तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ऐसे नारों के पीछे किसकी सोच है, यह सामने आना चाहिए. साथ ही उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं से इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग की.
गिरिराज सिंह ने कहा,
“कौन माई का लाल ऐसा पैदा हो गया है, जो भारत को तोड़ना चाहता है? यह बताता है कि उनकी मानसिकता क्या है।”
केंद्रीय मंत्री ने जामिया और शाहीन बाग का जिक्र करते हुए कहा कि देश के लोगों को ऐसे मामलों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा,
“अब देश के लोगों को, देशभक्तों को यह सोचना पड़ेगा कि ऐसे लोगों का मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा।”
गिरिराज सिंह ने विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.
जामिया की दीवारों पर लिखे गए ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील’ के नारे
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले कई दिनों से छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शन के दौरान कुछ दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे होने की बात सामने आई है. इसके अलावा आरएसएस और एबीवीपी के खिलाफ भी नारे लिखे जाने की खबरें हैं. इन नारों को लेकर कैंपस में विवाद खड़ा हो गया है। कुछ छात्रों का दावा है कि यह काम बाहरी लोगों का हो सकता है.
विवादित नारों पर जामिया प्रशासन सख्त
दीवारों पर लिखे नारों के मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. प्रशासन के मुताबिक, यदि जांच में किसी छात्र की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. गंभीर मामले में विश्वविद्यालय से निष्कासन जैसे कदम पर भी विचार किया जा सकता है. वहीं, यदि इस घटना में किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है.
छात्र आंदोलन में बाहरी हस्तक्षेप का आरोप
जामिया प्रशासन का आरोप है कि कुछ बाहरी तत्व और राजनीतिक दल आंदोलन को प्रभावित कर रहे हैं. प्रशासन के मुताबिक, इससे छात्रों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने में मुश्किल आ रही है.
हालांकि, आंदोलन को बाहरी लोगों द्वारा प्रभावित किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल, छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन और दीवारों पर लिखे विवादित नारों—दोनों मुद्दों पर विवाद जारी है.