उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक मंत्री जयवीर सिंह ने हाल ही में जनपद मैनपुरी का दौरा किया। पुलिस लाइन रोड स्थित ट्रांजिट हॉस्टल में उन्होंने न केवल जनता की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को तुरंत निस्तारण के आदेश दिए, बल्कि पत्रकारों से वार्ता करते हुए विपक्ष के नेता अखिलेश यादव और सदन में चल रहे हंगामे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कड़े और स्पष्ट बयान दिए।
कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने मैनपुरी में प्रेस से बात करते हुए तीन प्रमुख बिंदुओं पर अपनी राय रखी:
विपक्ष के नेता अखिलेश यादव द्वारा बजट को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए जयवीर सिंह ने कहा कि पूरा देश महसूस कर रहा है कि अखिलेश जी के ‘जंगल राज’ के बाद प्रदेश कहां पहुंचा है। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने राजस्व के क्षेत्र में हो, औद्योगिक क्षेत्र में, कानून व्यवस्था और विकास में नई कीर्तिमान स्थापित करके जो अखिलेश के राज में बीमारू राज्य हुआ करता था, उसे ‘ग्रेट इंजन’ बनाने का काम किया है।” उन्होंने जोर दिया कि पिछले नौ साल के कार्यकाल में प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है।
शंकराचार्य की पदवी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान (कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं होता) पर सहमति जताते हुए जयवीर सिंह ने कहा कि पूरा देश जानता है कि सनातन संस्कृति में चार पीठों के सर्वमान्य शंकराचार्य होते हैं। उन्होंने कहा कि ये परंपराएं ही हमारी सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा, संरक्षण देती हैं और सनातन को निरंतर मजबूती प्रदान करने का काम करती हैं।
लोकसभा और विधानसभा में विपक्ष द्वारा किए जा रहे हंगामे पर मंत्री जयवीर सिंह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में सरकार की नीतियों में त्रुटियां बताना और सुझाव देना विपक्ष का दायित्व होता है। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपने दायित्वों को भूलकर केवल हंगामा खड़ा करना, सदन को ‘हैंग’ कर लेना और ‘गाली गुल्ला’ करना अपने मूल चरित्र में ले आया है।
माइक बंद करने के आरोपों पर जवाब: डिंपल यादव के इस आरोप पर कि लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाता और माइक बंद कर दिए जाते हैं, जयवीर सिंह ने साफ किया कि लोकसभा हो या विधानसभा, ये नियमों, मानकों और परंपरा से चलती है, सपा का ‘हल्ला बोल’ नहीं चलता। उन्होंने कहा कि वहां बोलना भी आवश्यकता और तथ्यों के आधार पर होता है।
ट्रेड डील पर स्पष्टीकरण: अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल ‘सैद्धांतिक सहमति’ है। यह अंतिम डील तब मानी जाती है जब दोनों पक्षों के समझौते होते हैं और डॉक्यूमेंट का आदान-प्रदान होता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार बिना कुछ छुपाए, पूरा विवरण सदन और मीडिया में रखेगी।
कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह के ये बयान दर्शाते हैं कि सरकार विकास के एजेंडे पर कायम है, साथ ही वह विपक्ष के विरोध को रचनात्मक सुझावों के बजाय केवल हंगामा पैदा करने की कोशिश मान रही है।









