मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला मोहरी-सतई घाट फोरलेन कॉरिडोर अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 40 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सफर आसान होने के साथ यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।
40 किलोमीटर का घाट सेक्शन अब सिर्फ 40 मिनट में
मोहरी से सतई घाट के बीच करीब 39.5 किलोमीटर लंबे हिस्से को फोरलेन किया जा रहा है। अभी इस घाट सेक्शन को पार करने में करीब डेढ़ से दो घंटे तक लग जाते हैं। नई सड़क बनने के बाद यही दूरी लगभग 40 मिनट में तय होने की उम्मीद है।
इस क्षेत्र में अब तक संकरी सड़क, तीखे मोड़, खतरनाक ढलान और कम विजिबिलिटी के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती थी। फोरलेन कॉरिडोर में बेहतर अलाइनमेंट और सुरक्षित ड्राइविंग की सुविधा मिलने से यात्रा आसान होगी।
क्या-क्या बनाया जा रहा है?
इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 39.5 किलोमीटर फोरलेन हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 38 किलोमीटर मुख्य कैरेजवे और 26 किलोमीटर सर्विस एवं स्लिप रोड शामिल हैं।
इसके अलावा कॉरिडोर पर 3 बड़े पुल, 11 छोटे पुल, 8 व्हीकुलर अंडरपास, 4 लाइट व्हीकुलर अंडरपास, एक ओवरपास, 19 बस शेल्टर, 22 जंक्शन सुधार और एक ट्रक ले-बाय भी बनाया जा रहा है।
सागर से खजुराहो का सफर होगा आधा
फोरलेन कॉरिडोर बनने का सबसे बड़ा फायदा बुंदेलखंड के प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों को मिलने वाला है। अनुमानित यात्रा समय के मुताबिक,
- सागर से खजुराहो: 4-4.5 घंटे से घटकर 2-2.5 घंटे
- सागर से छतरपुर: 3.5-4 घंटे से घटकर 1.5-2 घंटे
- भोपाल से कानपुर: 12-13 घंटे से घटकर 7-8 घंटे
- इंदौर से कानपुर: 16-18 घंटे से घटकर 10-11 घंटे
इससे खजुराहो और पन्ना टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
जंगल से गुजरता है कॉरिडोर, वन्यजीवों का भी ध्यान
यह हाईवे मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में सड़क निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए 7 एनिमल अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
इसके साथ आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, स्लोप स्टेबिलाइजेशन और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय पत्थरों से गेबियन वॉल बनाने से स्टील की खपत और निर्माण लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी।
यूपी और एमपी के बीच मजबूत होगी कनेक्टिविटी
मोहरी-सतई घाट कॉरिडोर मध्य प्रदेश के सागर, छतरपुर, पन्ना और दमोह को उत्तर प्रदेश के कबरई, महोबा और बांदा होते हुए कानपुर से जोड़ने वाले बड़े सड़क नेटवर्क का हिस्सा है।
भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर को मजबूत करने से माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, कृषि उत्पादों की तेज आवाजाही और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
रोजगार और कारोबार को भी मिलेगा फायदा
बेहतर हाईवे कनेक्टिविटी का असर सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। सड़क बनने के बाद वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही बुंदेलखंड के कृषि उत्पादों और स्थानीय कारोबार को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
राजस्थान से यूपी और पूर्वी भारत तक आसान होगा रास्ता
भोपाल-सागर-कबरई-कानपुर रूट के बेहतर होने से राजस्थान की ओर से आने वाले भारी और व्यावसायिक वाहनों को भी यूपी और आगे पूर्वी भारत की तरफ जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। इससे बुंदेलखंड का यह कॉरिडोर क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन के लिहाज से और महत्वपूर्ण हो जाएगा।