वाराणसी का श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर इन दिनों आस्था, संगीत और कला के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है। चार दिवसीय ‘महाशिवरात्रि महोत्सव’ के तहत तृतीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या अत्यंत भव्य और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई, जिसने न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति की अनुभूति कराई, बल्कि काशी की समृद्ध कला विरासत को भी मंच प्रदान किया।
महाशिवरात्रि महोत्सव के तीसरे दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या का प्रत्येक क्षण भक्ति, संगीत और नृत्य की अनुपम प्रस्तुतियों से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ), डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए। मुख्य अतिथि के रूप में के. वेंकट रमण घनपाठी तथा सिविल डिफेन्स के डिविजनल कमांडेंट जेडी सिंह की उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
संध्या की शुरुआत सुप्रसिद्ध कलाकार सुप्रिया शाह के भावपूर्ण सितार वादन से हुई, जिसमें तबले पर विभाष महाराज ने शानदार संगत दी। इसके तुरंत बाद, रंजना राय ने अपने मनोहारी लोक गायन से श्रोताओं को लोक संस्कृति की मधुर धारा में प्रवाहित कर दिया। उनके साथ पैड पर सत्यम, कीबोर्ड पर अवनीश, ढोलक पर विनय दुबे और मंजीरा पर सुलेखा सिन्हा ने सराहनीय संगत दी।
कलाकारों की प्रस्तुतियों का सिलसिला यहीं नहीं थमा। तत्पश्चात, सौरभ मिश्र और गौरव मिश्र ने कथक नृत्य की सजीव प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी भाव-भंगिमाओं और ताल-संयोजन ने सभागार में तालियों की गूंज भर दी। कार्यक्रम का समापन श्री शनि मिश्र के भक्तिमय गायन से हुआ, जो सीधे भगवान शिव को समर्पित था। कीबोर्ड पर मनीष मिश्र, ढोलक पर दिवाकर मिश्र, ऑक्टोपैड पर अनीश, तबले पर शिवांश तिवारी और पर्कशन पर शिवम् सिंह की संगत ने पूरे वातावरण को पूर्णतः शिवमय बना दिया। सह-गायन में मुस्कान सिंह और राही सिंह की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही। पूरे कार्यक्रम का संचालन मीनाक्षी दीक्षित ने प्रभावी ढंग से किया।
यह सांस्कृतिक संध्या काशी की सनातन परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध कलात्मक विरासत का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी, जिसने महाशिवरात्रि के पर्व को न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अविस्मरणीय बना दिया।









