कोलकाता दुर्गा पूजा हादसा: FIR के बाद 7 गिरफ्तार, जानें अब तक का एक्शन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है.
कोलकाता दुर्गा पूजा हादसा
कोलकाता दुर्गा पूजा हादसा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम हुए इस हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की बात सामने आयी है. मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर 14 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, जिनमें से सात को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों में पूजा समिति के पदाधिकारी, भीड़ प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी और निजी सुरक्षा एजेंसी के लोग शामिल हैं.

आयोजकों समेत सात लोग गिरफ्तार

चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है. शुरुआती कार्रवाई में 14 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। बाद में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तार लोगों में पूजा समिति के सचिव राज कुमार सेवड़ा, उपाध्यक्ष शांतनु दुबे, पंडाल निर्माण से जुड़े बिप्लब मुखर्जी, भीड़ नियंत्रण से जुड़े कौशिक साहा और पिंटू डे तथा निजी सुरक्षा के प्रभारी सुमन चक्रवर्ती और राजेश पाल शामिल हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पंडाल में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई.

बोबाजार के कुछ हिस्सों में धारा 163 लागू

भगदड़ के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोलकाता पुलिस ने बोबाजार इलाके के कुछ हिस्सों में 18 से 20 अक्टूबर तक निषेधाज्ञा लागू की है. पुलिस कमिश्नर अजय नंद की ओर से जारी आदेश के तहत संबंधित क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी जमावड़े, लाठी या खतरनाक हथियार लेकर चलने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई गई है.

हादसे की जांच के लिए SIT गठित

राज्य सरकार ने भगदड़ की परिस्थितियों और संभावित सुरक्षा चूक की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है. पुलिस पंडाल आयोजन समिति के सदस्यों, निजी सुरक्षा कर्मचारियों और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से पूछताछ कर रही है. जांच में भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास के रास्तों, पंडाल की संरचना तथा आयोजन के दौरान की गई घोषणाओं की भूमिका की पड़ताल की जा रही है. घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम ने भी जांच की है.

बारिश और लाउडस्पीकर की घोषणा से बढ़ी भीड़?

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 7:30 से 7:40 बजे के बीच तेज बारिश के दौरान पंडाल के बाहर मौजूद लोग बारिश से बचने के लिए तेजी से अंदर जाने लगे, इस दौरान संकरी जगह पर भीड़ का दबाव बढ़ गया और कई लोग गिर पड़े, इसके बाद भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुरुआती जानकारी के आधार पर आयोजकों की ओर से लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा को भी संभावित वजह बताया. कुछ रिपोर्टों में सीटी बजने और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनने का भी जिक्र है. हालांकि, हादसे की सटीक वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जारी है.

पंडाल बंद, अन्य आयोजनों की सुरक्षा की भी समीक्षा

हादसे के बाद चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल को आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया. पुलिस ने दूसरे भीड़भाड़ वाले पूजा पंडालों में भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की है। प्रशासन का ध्यान प्रवेश और निकास मार्गों को सुरक्षित रखने, भीड़ को नियंत्रित करने और आपात स्थिति में राहत पहुंचाने की व्यवस्था पर है.

19 लोगों की मौत, 25 घायल

मुख्यमंत्री और प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, हादसे में 19 लोगों की जान गई और 25 लोग घायल हुए. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद राज्य सरकार ने जांच और जवाबदेही तय करने की बात कही है. फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि भारी भीड़ के बीच सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं, और क्या आयोजन समिति या संबंधित कर्मचारियों की ओर से कोई लापरवाही हुई. गिरफ्तारी और हिरासत जांच का हिस्सा हैं, दोष तय होना न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

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